सुरेऊ गांव में लोग आज भी सांप के काटने पर अस्पताल नहीं जाते, आश्चर्य है कि इन पर सांप के जहर का कोई असर नहीं होता...
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कोमल नेगी
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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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Image: Sureu village of naag devta uttarakhand
: उत्तराखंड के पौराणिक मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। हर मंदिर की अपनी अलग मान्यता है, जिनसे जुड़ी है चमत्कार की कई कहानियां...ये कहानियां आश्चर्यचकित करती है, तो साथ ही ये मानने को मजबूर भी, कि कहीं ना कहीं इंसान और विज्ञान से बढ़कर भी कोई शक्ति है। ऐसी ही कहानी जुड़ी है विकासनगर की एक खास गुफा से, कहते हैं कि इस गुफा में साक्षात नागराज विराजते हैं। ये गुफा जौनसार बावर के कालसी तहसील में सुरेऊ गांव के पास स्थित है। सुरेऊ गांव में जब भी किसी को सांप काटता है, तो ग्रामीण पीड़ित का इलाज नहीं कराते। नाग देवता का स्मरण करते हैं, और कहते हैं कि नागदेव को याद करने मात्र से ही लोग ठीक हो जाते हैं। सांप के काटने पर उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में रहने वाले लोग सदियों से इस मान्यता पर विश्वास करते आए हैं, और ये भी सच है कि यहां के लोगों पर सांप के जहर का असर नहीं होता। अब ये चमत्कार नहीं तो फिर क्या है। आगे पढ़िए
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गांव वाले इसे नाग देवता का आशीर्वाद मानते हैं। गांव से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है नगाया गुफा, कहते हैं यहां जो भी सच्चे मन से नाग देवता को याद करता है, उसे नागदेवता दर्शन जरूर देते हैं। हर साल अगस्त में लोग नाग देवता की पूजा करते हैं, इस दौरान तीन दिन तक व्रत का पालन किया जाता है। नाग देवता को रोट, दाल और शुद्ध घी का भोग लगाया जाता है, उसके बाद ही गांव वाले व्रत खोलते हैं। सुरेऊ गांव में 60 परिवार रहते हैं, जो कि सदियों से नाग देवता की पूजा करते आ रहे हैं। लोग कहते हैं कि उन पर जहरीले सांप के काटे का कोई असर नहीं होता। सांप तभी काटते हैं, जब नाग नाराज होते हैं। इसे ही नाग दोष कहते हैं। कहते हैं कि सच्चे मन से मांगी हुई मुराद नाग देवता जरूर पूरी करते हैं। यही वजह है कि यहां स्थित नाग गुफा में नाग देवता की पूजा के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।