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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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देहरादून: उत्तराखंड के होनहार क्रिकेटर शाश्वत रावत ने देवभूमि को गौरवान्वित किया है। क्रिकेट के लिए महज 9 साल की उम्र में घर छोड़ देने वाले शाश्वत का चयन इंडियन अंडर-19 टीम में हुआ है। यहां तक पहुंचने के लिए शाश्वत ने जो संघर्ष किया, उस संघर्ष ने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचा दिया। शाश्वत हरिद्वार के लालढांग के रहने वाले हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ शौक नहीं बल्कि जुनून है। शाश्वत की मां नीरू रावत और पिता गोपाल रावत भी बेटे की इस उपलब्धि से गर्वित हैं। नीरू रावत बताती हैं कि शाश्वत ने बचपन में ही तय कर लिया था कि उसे क्रिकेटर ही बनना है। 9 साल की उम्र में उसने क्रिकेट के लिए घर छोड़ दिया। 8वीं तक की पढ़ाई देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज से की। वहां क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। बाद में शाश्वत ने बड़ौदरा की टीम से खेलना शुरू किया, क्योंकि उत्तराखंड की टीम को उस वक्त मान्यता नहीं मिली थी। पिता गोपाल रावत कहते हैं कि शाश्वत इंडिया का हर मैच देखता था।