उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन की खबरें बेबुनियाद, CM त्रिवेन्द्र ने लगाया अटकलों पर विराम

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra singh rawat) ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तो उनके सीएम बनने के कुछ महीने बाद से ही शुरू हो गई थीं, इस तरह की बातों से उन्हें फर्क नहीं पड़ता। वो सिर्फ विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहते हैं...
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Trivendra singh rawat: Trivendra singh rawat Cm uttarakhand stoped to speculation about change in leadership
Image: Trivendra singh rawat Cm uttarakhand stoped to speculation about change in leadership

देहरादून: उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से जो खबर सबसे ज्यादा चर्चा में है, वो है प्रदेश सरकार में नेतृत्व परिवर्तन...सोशल मीडिया में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर इतनी कहानियां गढ़ी गईं, कि खुद बीजेपी के बड़े नेताओं को सामने आना पड़ा। और कहना पड़ा कि इस तरह की चर्चाएं सिर्फ अफवाह हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं। पक्ष-विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक इस विषय पर अपनी बात कह रहे थे, लेकिन अब खुद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (Trivendra singh rawat) ने इन अफवाहों पर विराम लगाने की पहल की है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत बोले कि नेतृत्व परिवर्तन की बेबुनियाद बातें तो उनके पद संभालने के कुछ महीने बाद से ही शुरू हो गई थीं। उन्हें इनसे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आम जनता और कर्मचारियों पर इसका जरूर असर पड़ता है। इस तरह की अफवाहों से विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं।

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मंगलवार को सीएम (Trivendra singh rawat) ने मुंबई में आयोजित रोड शो में हिस्सा लिया। ये रोड शो अप्रैल में राज्य में होने वाले वेलनेस समिट को लेकर आयोजित किया गया था। मुंबई से देहरादून रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहों से उन्हें फर्क नहीं पड़ता। वो इन चर्चाओं पर ध्यान देने की बजाय अपने काम को तवज्जो देना पसंद करते हैं। शिकायत करना उनका स्वभाव नहीं है। आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने एक ट्वीट किया था, जिसमें प्रदेश में राजनैतिक अस्थिरता का वातावरण बनने का अंदेशा जताया गया था। इस ट्वीट के बाद से सूबे की सियासत में लगातार हलचल मची है। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के हर कार्यक्रम को नेतृत्व परिवर्तन से जोड़कर खबरें फैलाई जा रही हैं। जिससे सरकार और पार्टी संगठन असहज महसूस कर रहे हैं।