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केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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पौड़ी गढ़वाल: इन दिनों हर तरफ बस एक ही शब्द सुनाई दे रहा है ‘कोरोना’। देश 21 दिनों के लिए लॉकडाउन है। हर तरफ खामोशी छाई है। लोग कोरोना के साथ-साथ अजीब से डर का सामना कर रहे हैं। कोरोना के खौफ से डरे प्रवासी भी पहाड़ लौट रहे हैं, हालांकि ये सही नहीं है। कोरोना के खतरे से निपटना है तो जरूरी है कि हम जहां हैं, वहीं रहें। इससे हमारे साथ-साथ दूसरे लोग भी सुरक्षित होंगे, लेकिन लोग ये बात समझ नहीं रहे। प्रवासियों ने नौकरी के लिए पहाड़ को छोड़ दिया था, जो कि शायद उस वक्त सही फैसला भी था। अब कोरोना की मुसीबत के वक्त उन्हें वही पहाड़ सबसे ज्यादा सुरक्षित लग रहा है। मार्च में अब तक 18 हजार से ज्यादा प्रवासी पहाड़ लौट चुके हैं। टिहरी जिले में 256 लोग वापस लौट आए हैं। ये लोग चीन-जापान समेत अलग-अलग देशों में काम करते थे। हालांकि प्रवासियों के घर लौटने से गांवों में दहशत का माहौल है। लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई जगह से खबरें आ रही हैं कि ग्रामीणों ने इन लोगों के गांव में दाखिल होने का पुरजोर विरोध भी किया। प्रशासन से उनकी मेडिकल जांच की मांग की। आगे जानिए बाकी जिलों का हाल