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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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चमोली: सदियों से हम ये ही सुनते रहे हैं कि एक उत्तराखंडी ही एक उत्तराखंडी के काम आ सकता है। हम इंसानियत के मूल्यों को समझते हैं, एक दूसरे की भावनाओं का आदर करते हैं। अपनों से बिझड़े हुए लोगों को अपनों से मिलवाते हैं। ज़रा सोचिए कितना प्यार और सम्मान है हम उत्तराखंडियों का एक दूसरे के दिलों में। कुछ दिन पहले राज्य समीक्षा ने बेंगलुरु में फंसे कुछ उत्तराखंडी भाइयों की खबर दिखाई थी। हमें गर्व है कर्नाटक राज्य के उत्तराखंड महासंघ पर..उत्तराखंड महासंघ के रमन शैली ने हमसे संपर्क किया और भरोसे के साथ बताया कि ‘भेजी अब सब ठीक है, आप चिंता न करें। सभी लोग सुरक्षित हैं।’ आज के दौर में कौन मानवीय मूल्यों कि फिक्र करता है लेकिन उत्तराखंड महासंघ को हमारा साधुवाद
लॉकडाउन के बीच अभी तक उत्तराखंड महासंघ कर्नाटक का में 200 से ज्यादा होटलियर भाइयो सम्पर्क हो चुका है, जिन्हें होटल मालिकों नौकरी से निकाल दिया है और उन्हें गाँव वापस जाने को बोल दिया गया था। ये वो लोग हैं जिनसे सम्पर्क हो चुका है और जिन लोगो से सम्पर्क नही हुआ वो होटलियर की संख्या 15000 से ज्यादा है। विभिन्न सोशल मीडिया व कॉल से प्राप्त जानकारियों से पता चला कि उत्तराखंड के मनीष पांडे बेंगलुरु में होटल में काम कर रहा थे। वो भी लॉक डाउन में फंस गए थे। 24 घण्टे से ज़्यादा समय से भूखे मनीष ने जब फेसबुक पर लाइव वीडियो डाला तो ये खबर उत्तराखंड महासंघ तक पहुंची। तुरंत ही टीम से सोहन रावत ने उनकी लोकेशन ढूंढी और अपने घर ले आए। वहां उन्होंने मनीष को अपने ही घर रखा है। कुछ ऐसी ही ख़बर कर्नाटक के रायचूर ज़िले से मिली जहाँ रुद्रप्रयाग के लगभग 15 लोगों के फंसे होने की जानकारी प्राप्त हुई। उत्तराखंड महासंघ की टीम के द्वारा वहां पर उन्हें समय पर खाद्य सामग्री दी गई। ऐसे कई कॉल्स व सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की जानकारी मिल रही हैं। उत्तराखंड महासंघ द्वारा सभी की जानकारी एकत्रित कर उन तक मदद पहुँचाई जा रही है। आगे भी पढ़िए पूरी खबर