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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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अल्मोड़ा: कोरोना के डर से इंसान तो क्या भगवान भी मंदिरों में कैद होकर रह गए हैं। जिन मंदिरों के दरवाजे भक्तों के लिए हमेशा खुले रहते थे, वहां अब ताला लटका है। हर तरफ सन्नाटा पसरा है। रामनवमी के मौके पर भी मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा। एक दिल तोड़ने वाली खबर अल्मोड़ा से भी आई। जहां रामशिला मंदिर में रामनवमी के दिन भी पूजा-अर्चना नहीं हुई। पिछले 432 साल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ, जबकि मंदिर में रामनवमी के दिन पूजा ना हुई हो। ऐतिहासिक रामशिला मंदिर अल्मोड़ा की खास पहचान है। चलिए आज आपको इस मंदिर समूह का इतिहास भी बताते हैं। रामशिला मंदिर समूह जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट भवन के पास स्थित है। मंदिर समूह की स्थापना सन् 1588 में कुमाऊं के चंद वंशीय राजा रुद्रचंद ने की थी। आगे जानिए इस मंदिर के बारे में कुछ खास बातें