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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड कोरोना की चौतरफा मार झेल रहा है। यहां अब तक कोरोना के 42 पॉजिटिव केस मिले हैं। लॉकडाउन के चलते हर तरह के व्यवसाय ठप पड़े हैं। पहाड़ के लोगों को कोरोना संक्रमण के खतरे के साथ-साथ आर्थिक मोर्चों पर भी लड़ना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण का असर प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाली चारधाम यात्रा पर भी पड़ा है। 29 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने हैं। कपाट पूजा के लिए रावल भीमाशंकर लिंग अपने सेवादारों के साथ उत्तराखंड पहुंच गए हैं। ऊखीमठ पहुंचने पर प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर उनका हालचाल पूछा। साथ ही रावल समेत सभी 5 सेवादारों को होम क्वारेंटीन कर दिया गया है। सभी को अलग-अलग कमरों में ठहराया गया है। कपाट खुलने के समय आयोजित धार्मिक परंपराओं में रावलों का रहना जरूरी है, लेकिन रावलों को लॉकडाउन के दौरान उत्तराखंड तक लाना राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। राहत वाली बात ये है कि केदारनाथ के रावल ऊखीमठ पहुंच चुके हैं।