देहरादून से लौटे परिवार को गांव वालों ने घर में घुसने नहीं दिया। प्रशासन ने इस परिवार को होम क्वारेंटीन रहने के निर्देश दिए थे, लेकिन ग्रामीण परिवार को संस्थागत क्वारेंटीन करने की मांग पर अड़े रहे। फिर क्या हुआ यहां पढ़ें...
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komal
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Image: Villagers stopped the family from home quarantine
चमोली: उत्तराखंड में प्रवासियों का स्वागत नहीं हो रहा। वजह साफ है, प्रवासियों के लौटने के बाद उत्तराखंड में जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं, उसे देख गांववाले दहशत में हैं। कई जगह दूसरे क्षेत्रों से गांव लौटने वाले प्रवासियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। विरोध की ऐसी ही कुछ तस्वीरें चमोली के गोपेश्वर से आई हैं। जहां देहरादून से गांव लौटे एक परिवार को गांव वालों ने घर में दाखिल नहीं होने दिया। इस परिवार को मेडिकल टीम ने होम क्वारेंटीन में रहने की सलाह दी थी, लेकिन गांव वाले कुछ सुनने को तैयार नहीं हुए। वो प्रवासी परिवार से फैसेलिटी क्वारेंटीन में जाकर रहने की जिद करने लगे। इस बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक झगड़ा होता रहा। बात बढ़ने पर प्रशासन की टीम को मौके पर आना पड़ा। टीम के समझाने के बाद कहीं जाकर गांव वाले शांत हुए।
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मामला दशोली विकासखंड के बमियाला गांव का है। जहां माधो सिंह रावत और उनका परिवार देहरादून से लौटा था। माधो सिंह को उम्मीद थी कि वो गांव में ज्यादा सुरक्षित रहेंगे, साथ ही खेती भी कर लेंगे, लेकिन यहां पहुंचते ही गांववालों ने उन्हें घेर लिया। गांव वालों ने कहा कि बाहर वाले लोग कोरोना संक्रमण साथ ला रहे हैं, इसलिए उन्हें फेसेलिटी क्वारेंटीन में रहना होगा। माधो सिंह ने बताया कि वो हार्ट पेशेंट हैं, पत्नी को डायबिटिज है, उनका गौचर में स्वास्थ्य परीक्षण हो चुका है, लिहाजा उन्हें घर में रहने दिया जाए, लेकिन ग्रामीण हंगामा करने लगे। बाद में एडीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर भेज गया। जिसने माधो सिंह और उनके परिवार की दोबारा जांच की। टीम के समझाने के बाद ग्रामीण शांत हो गए। वहीं एडीएम एमएस बर्निया ने कहा कि ग्रामीणों को किसी को होम क्वारेंटीन से रोकने का अधिकार नहीं है। किसी के साथ ऐसा करना सरासर गलत है।