गढ़वाल से गु़ड न्यूज..77 साल की दादी ने कोरोना को हराया, ढोल दमाऊं के साथ हुआ स्वागत

कोरोना वायरस से लड़ने का सबसे सही तरीका है..आत्म विश्वास। पौड़ी गढ़वाल की इस बुजुर्ग महिला ने ऐसा ही कर दिखाया...आगे पढ़िए
Advertisement ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
Pauri Garhwal Gayatri Devi: Pauri garhwal 77 years gayatri devi won fight against coronavirus
Image: Pauri garhwal 77 years gayatri devi won fight against coronavirus

पौड़ी गढ़वाल: ये बात तो आपने सुनी ही होगी कि अगर मन में विश्वास है, तो कोई भी परेशानी बड़ी नहीं होती।कोरोनावायरस जैसी बीमारी को अगर हराना है तो इसके लिए सबसे पहले इच्छाशक्ति का मजबूत होना जरूरी है। पौड़ी गढ़वाल की 77 साल की बुजुर्ग गायत्री देवी की इच्छाशक्ति भी मजबूत है। आमतौर पर आपने भी सुना होगा कि कोरोनावायरस बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक है। लेकिन पौड़ी गढ़वाल की 77 साल की बुजुर्ग महिला ने ना सिर्फ इस जानलेवा बीमारी का डटकर मुकाबला किया बल्कि इस पर जीत भी हासिल की। पौड़ी गढ़वाल के एकेश्वर ब्लॉक के सतपाली गांव की गायत्री देवी 77 साल की बुजुर्ग महिला हैं । 6 मई को गायत्री देवी गुरुग्राम से अपने गांव आई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उन्हें होम क्वॉरेंटाइन किया गया था। कुछ वक्त बाद बुजुर्ग महिला को खांसी और बुखार की शिकायत होने लगी। आगे पढ़िए

यह भी पढ़ें - उत्तराखंड: 16 साल की बच्ची को गुलदार ने बनाया निवाला, गांव में मचा कोहराम
बुजुर्ग महिला को खांसी और बुखार की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें जिला चिकित्सालय ले गई। गायत्री देवी के सैंपल लिए गए और 20 मई को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद प्रशासन द्वारा उनके पूरे सतपाली गांव को सील कर दिया गया था। जिला अस्पताल पौड़ी में उनका इलाज चल रहा है। शनिवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई और उनकी रिपोर्ट भी अब नेगेटिव है। गायत्री देवी के गांव लौटने पर काम वाले बेहद खुश थे। उनका फूलों से स्वागत किया गया। ढोल दमाऊ के साथ उनका स्वागत किया गया। गायत्री देवी कहती हैं कि उन्हें कभी भी इस बात का अहसास नहीं हुआ कि उन्हें कोरोनावायरस जैसी बीमारी है। इस बात की फिक्र थी कि उनकी वजह से गांव वालों को कोई परेशानी ना आए। गायत्री देवी एकदम स्वस्थ हैं और अपने गांव में है।