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चमोली: चमोली में जो हुआ वह बेहद दिल दहला देने वाला था। उत्तराखंड के चमोली जिले में बीते रविवार की सुबह 10 बजे ग्लेशियर टूटकर धौली नदी में गिर गया और बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए। तपोवन इलाके के रैणी गांव में में धौली नदी का स्तर अचानक ही बढ़ गया और वह उफान पर आ गई। इस पूरी आपदा में कई मजदूर लापता हो गए हैं और ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट के साथ ही भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ है। ग्लेशियर के टूटने से यह हादसा हुआ। चलिए आपको बताते हैं कि ग्लेशियर होते क्या हैं और यह कैसे टूटटे हैं। ग्लेशियर को हिंदी में हिमनद कहते हैं। ग्लेशियर बर्फ की नदी होती है जिसका पानी ठंड के कारण जम जाता है। जब यह ग्लेशियर टूट जाते हैं तो नदी का स्तर खुद-ब-खुद बढ़ जाता है और बाढ़ जैसे हालात तक उत्पन्न हो जाते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर का टूटना और भी अधिक खतरनाक माना जाता है ऐसा इसलिए क्योंकि पहाड़ियों पर पानी का बहाव काफी तेज होता है और ऐसी स्थिति तबाही ला सकती है। नदी अपनी तेज बहाव के साथ हर चीज को तबाह करते हुए चलती है।आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ग्लेशियर पृथ्वी पर पानी का सबसे बड़ा सोर्स हैं और कई नदियों का जलस्तर ग्लेशियर के वजह से ही बढ़ता रहता है और ग्लेशियर का टूटना गंभीर आपदा को निमंत्रण देता है।