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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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चमोली: चमोली में आया आपदा का सैलाब अपने पीछे कई दर्दभरी कहानियां छोड़ गया। प्रकृति का रौद्ररूप देखकर हर कोई सहमा हुआ है। इस आपदा में किसी ने अपना बेटा खो दिया तो किसी ने अपना पति। कई परिवारों के इकलौते कमाऊ सदस्य आपदा के सैलाब में बह गए। चमोली के तपोवन क्षेत्र में रहने वाले रामकृष्ण सेमवाल ने भी आपदा में अपनी पत्नी और बेटी को खो दिया। आपदा के 12 दिन बाद भी इन लोगों का कुछ पता नहीं चला। बुजुर्ग रामकृष्ण अपना दर्द बयां करते-करते रो पड़ते हैं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। रामकृष्ण कहते हैं कि हर समय बेटी और पत्नी का चेहरा सामने आ जाता है। बुजुर्ग रामकृष्ण दूध बेचकर घर का भरण-पोषण करते हैं। 7 फरवरी को आई आपदा ने जिन लोगों के परिवार उजाड़े, दुर्भाग्य से रामकृष्ण भी उनमें से एक हैं।