नैनीताल के हल्द्वानी में एक तेंदुए ने चलने का रिकॉर्ड बना लिया है और पर्वतीय क्षेत्र में उसने 1 दिन में 216 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है।
-
Komal Negi
-
Advertisement
Hidden Gem Treks of Kedar Himalaya You Must Explore Once in Life
Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.
Example Ads Media
Image: Leopard moves 216 km a day in Uttarakhand
नैनीताल: नैनीताल जिले से एक चौंका देने वाली घटना सामने आई है। आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि नैनीताल के हल्द्वानी में एक तेंदुए ने चलने का रिकॉर्ड बना लिया है और पर्वतीय क्षेत्र में उसने 1 दिन में 216 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है। जी हां, आमतौर पर एक जंगल में तेंदुआ भोजन की तलाश में रोजाना 40 किलोमीटर तक का ही सफर तय करता है, मगर कुमाऊं में तो एक तेंदुए ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और 1 दिन में 216 किलोमीटर चलने का रिकॉर्ड बनाया है। बता दें कि वह तेंदुआ चलते-चलते उस जगह पर पहुंच गया जिस जंगल से उसको पकड़ा गया था। अफसरों के मुताबिक नवंबर में बागेश्वर से एक तेंदुए को रानी बाग स्थित रेस्क्यू सेंटर में लाकर रेडियो कॉलर कर दिया गया था और उसको सेंटर से 50 किलोमीटर दूर एक जंगल में छोड़ दिया गया। तबसे उसकी लगातार मॉनीटरिंग की जा रही थी। आगे पढ़िए
यह भी पढ़ें - उत्तराखंड: भयानक सैलाब ला सकता है ये ग्लेशियर..यहां जमा है तबाही का मलबा
हाल ही में इस तेंदुए ने 1 दिन में लगातार सफर करते हुए 216 किलोमीटर की दूरी तय कर ली जो कि अपने आप में ही एक हैरान करने वाली बात है क्योंकि शिकार की तलाश में आमतौर पर तेंदुआ तकरीबन 40 किलोमीटर तक ही चलता है, मगर इस तेंदुए ने तो यह दूरी 5 गुना से भी अधिक कवर की है। यह तेंदुआ ठीक उसी जगह पर आ गया है जहां से उसको पकड़ा गया था। आपको बता दें कि उत्तराखंड के तेंदुए आबादी क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुके हैं और उनके व्यवहार में लगातार परिवर्तन आ रहा है जिसके लिए रिसर्च की गई और इस वर्ष हेतु पिछले साल सितंबर से अब तक 4 तेंदुए पर महकमा रेडियो कॉलर फिट कर चुका है। हरिद्वार, टिहरी और बागेश्वर का तेंदुआ इनमें शामिल है और इसी के अलावा राजाजी पार्क में शिफ्ट किए गए दो बाघों और तीन हाथियों के ऊपर भी रेडियो कॉलर से निगरानी की जा रही है
यह भी पढ़ें - उत्तराखंड का हैवान बाप..5 बेटियों ने पिता पर लगाया यौन शोषण का आरोप
महकमे के पास रेडियो कॉलर लगे इन वन्यजीवों की हर मूवमेंट का पूरा रिकॉर्ड है और यह दावा किया गया है कि इनमें से किसी ने भी आबादी क्षेत्र में कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाया है। आपको बता दें कि जिस तेंदुर ने 1 दिन में 216 किलोमीटर की दूरी तय की है उसको बागेश्वर से लाया गया था और सेंटर से 50 किलोमीटर दूर एक जंगल में छोड़ा गया था और वह ठीक उसी जगह वापस आ गया जहां से उसको पकड़ा गया था। वन विभाग द्वारा जिन भी तेंदुए एवं बाघों के ऊपर रेडियो कॉलर लगाया गया था उन सब में एक ही सामान्य निकली है कि वे सभी कभी ना कभी उस जगह पर वापस जरूर गए हैं जहां से उनको रेसक्यू किया गया था। जिस तेंदुए ने 1 दिन में 216 किलोमीटर की दूरी तय की है वह भी दोबारा घूमते घूमते उसे जंगल में पहुंच गया था जहां से उसका रेस्क्यू किया गया था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस गुलदार ने अब तक की अधिकतम दूरी तय की है। आपको बता दें कि फॉरेस्ट के पास एक सपोर्ट स्टाफ की पूरी टीम मौजूद है जो कि रेडियो कॉलर लगे हाथी,बाघ एवं 3 गुलदारों के ऊपर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है।