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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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रुद्रप्रयाग: ताउम्र गढ़वाली साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाले और गढ़वाली साहित्य के प्रचारक एवं पुरोधा पुष्कर कंडारी हमेशा-हमेशा के लिए मौन हो गए हैं। पुष्कर कंडारी जिन्होंने ना केवल एक साहित्यकार के रूप में समाज में एक अहम भूमिका निभाई बल्कि एक समाजसेवी के तौर पर भी उन्होंने उत्तराखंड में सेवाएं प्रदान की। उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस ली। बता दें कि पुष्कर कंडारी बीते 1 साल से अपने बड़े बेटे रवि शंकर भंडारी के साथ दिल्ली में रह रहे थे। वे बीते कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे जिसके बाद बीते शनिवार उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु के बाद उनके गांव और समस्त जिले में शोक की लहर छा गई है। वे अपने पीछे अपनी पत्नी, दो बेटे और दो बेटियों का एक भरा पूरा परिवार छोड़ कर गए हैं। चलिए आपको उनके जीवन के कुछ अनोखे पहलुओं से रूबरू कराते हैं।