सुमना में शुक्रवार को चीन-तिब्बत सीमा पर हिमस्खलन के चलते हुई तबाही में 10 लोगों की जान चली गई। 32 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
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Komal Negi
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Image: 10 dead bodies found so far in Chamoli disaster
चमोली: उत्तराखंड का चमोली जिला एक बार फिर आपदा से कराह रहा है। ढाई महीने पहले नीती घाटी में ग्लेशियर टूटने के बाद जमकर तबाही हुई थी। ऋषिगंगा आपदा के जख्म अभी भरे भी नहीं थे, कि शुक्रवार को सुमना में ग्लेशियर टूट गया। सुमना में हिमस्खलन से तपोवन, रैणी, सुरांईथोटा क्षेत्र के ग्रामीणों की रातों की नींद फिर उड़ गई है। सुमना क्षेत्र जोशीमठ से 94 किलोमीटर दूर है। यहां शुक्रवार को चीन-तिब्बत सीमा पर हिमस्खलन के चलते हुई तबाही में 10 लोगों की जान चली गई। आपदा में सात लोग घायल हुए हैं। जिन्हें इलाज के लिए सेना अस्पताल जोशीमठ में एडमिट कराया गया है। घायलों में एक की हालत गंभीर है। घायल मरीज को इलाज के लिए देहरादून भेजा गया है। सुमना में आपदा प्रभावित क्षेत्र से अब तक 391 लोग रेस्क्यू किए गए हैं। चमोली जिले में पिछले कई दिनों से बर्फबारी हो रही थी। शुक्रवार को यही जमी हुई बर्फ आफत बनकर टूट पड़ी। घटनास्थल पर अब भी राहत और बचाव कार्य चल रहा है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी के जवान और जिला प्रशासन की टीम भी जुटी हुई हैं।
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सुमना में अब तक 391 लोगों को बचाया गया है। खराब मौसम की वजह से राहत कार्यों में परेशानी आ रही है। बता दें कि सुमना में बीआरओ के मजदूर सड़क निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। पिछले तीन दिनों से नीती घाटी में अत्यधिक बर्फबारी हो रही थी। शुक्रवार को यहां दोपहर बाद हिमस्खलन हुआ। इस दौरान बीआरओ के दो कैंप पूरी तरह तबाह हो गए। इन कैंपों में 400 से 450 लोगों के रहने की बात कही जा रही है। जिस वक्त हिमस्खलन की घटना हुई उस दौरान बर्फबारी भी हो रही थी। ऐसे में मौके पर अफरातफरी का माहौल था। हिमस्खलन से देखते ही देखते पूरा कैंप तबाह हो गया। हादसे की सूचना मिलने पर सेना की टीमें मौके पर पहुंची और तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया, जिससे कई लोगों की जान बच गई। सेना के जवानों ने 391 लोगों को रेस्क्यू कर सेना के कैंप में पहुंचाया। 32 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। जिनकी तलाश जारी है।