उत्तराखंड: ब्रह्म मुहूर्त में खुले रुद्रनाथ के कपाट..यहां होते हैं भगवान शिव के एकानन दर्शन

आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पारंपरिक तरीके से खोले गए पंच केदार के चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट। यहां होते हैं भगवान शिव के एकानन मुख के दर्शन।
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Rudranath News: Rudranath temple doors opened
Image: Rudranath temple doors opened

चमोली: चमोली जिले में चतुर्थ केदारनाथ बद्रीनाथ के कपाट आज ब्रह्म मुहूर्त में पारंपरिक तरीके से रीति-रिवाज के साथ खोले दिए गए हैं। आपको बता दें कि पंच केदार के चतुर्थ केदार रुद्रनाथ में शिव के मुख के दर्शन होते हैं और आज सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में रुद्रनाथ के कपाट खोल दिए गए हैं। इस दौरान पुजारी धर्मेंद्र तिवारी ने कपाट खोल कर पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की। आज तड़के बाबा रुद्रनाथ की उत्सव डोली यात्रा रुद्रनाथ धाम पहुंची और पुजारी ने चतुर्थ केदार भगवान बाबा रुद्रनाथ के पट शिव भक्तों के लिए खोल दिए हैं। कोरोना के कारण अभी यहां पर यात्रा में आम श्रद्धालुओं को जाने की इजाजत नहीं है। बता दें कि धाम के अंदर पुजारी सहित 20 स्थानीय श्रद्धालुओं को ही आने की अनुमति दी गई है। बीते रविवार को चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की डोली गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर परिसर से कैलाश के लिए रवाना की गई थी और बेहद सीमित संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भगवान शिव अपने ग्रीष्मकालीन प्रवास कैलाश के लिए रवाना हुए थे और आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भगवान रुद्रनाथ के कपाट खोल दिए गए हैं। आगे पढ़िए

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अब अगले 6 महीने तक रुद्रनाथ में भगवान भोलेनाथ की पूजा और अर्चना की जाएगी। आपको बता दें कि पंच केदार में शामिल चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ धाम चमोली जिले में समुद्र तल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां पर भगवान शिव के एकानन मुख के दर्शन होते हैं। बीते रविवार को आभूषणों और फूलों से सजी हुई चतुर्थ केदार रुद्रनाथ की उत्सव डोली पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रवाना हुई। उत्सव डोली में कोरोना महामारी के चलते गिनती के लोग ही शामिल हुए और इस दौरान मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रखा गया। रुद्रनाथ की यात्रा अति दुर्गम मानी जाती है और यहां पर लगभग 19 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचा जाता है। गोपेश्वर से 5 किलोमीटर चोपता मोटर मार्ग पर सगर गांव के पास से रुद्रनाथ के लिए पैदल मार्ग जाता है और यात्रा मार्ग पर रहने की व्यवस्था नहीं है। रुद्रनाथ में ही मंदिर की धर्मशाला है। यही कारण है कि रूद्रनाथ की यात्रा बेहद कठिन मानी जाती है।