चमोली जिले में भारी भूस्खलन के चलते दसवें दिन भी मलारी हाइवे ठप, 16 गांव समेत सैन्य गतिविधियां हुईं प्रभावित।
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अनुष्का ढौंडियाल
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Image: landslide on malari highway
चमोली: मॉनसून के सीजन में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करना मुसीबत को आमंत्रण देने जैसा ही है। मूसलाधार बरसात के चलते उत्तराखंड के पहाड़ भारी मुसीबतों का सबब बने हुए हैं। आए दिन प्रदेश से भूस्खलन की दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा सड़क पर आ रहा है जिस वजह से कई सड़कें और हाईवे अवरुद्ध हो रखे हैं। चमोली जिले में चीन सीमा से जोड़ने वाला मलारी हाईवे बीते 10 दिनों से बंद हो रखा है और अब तक सुचारू नहीं हो पाया है। नीति घाटी में कोहरा होने के कारण अभी तक हेली रेस्क्यू शुरू नहीं हो पाया है। बीआरओ की जेसीबी मशीनें हाईवे को सुचारू करने में जुट चुकी हैं। नीति घाटी के ग्रामीण हाईवे के अवरुद्ध होने से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं और उनकी आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। ग्रामीणों की आवाजाही के लिए प्रभावित क्षेत्र में एक पैदल रास्ता बना लिया गया है और एसडीआरएफ और एनडीआरएफ टीम की निगरानी में ग्रामीण सुरक्षित आवाजाही कर रहे हैं।
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जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया के मलारी हाईवे को खोलने का काम चल रहा है और हाईवे पर जगह-जगह भारी मात्रा में गिरे बोल्डर और मलबे को जेसीबी द्वारा हटाया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही की हाईवे को खोला जा सकेगा। आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि अगर मौसम ने साथ दिया तो कल मंगलवार तक हाईवे को सुचारू कर दिया जाएगा। बता दें कि चमोली जनपद में वर्तमान में भूस्खलन के कारण 7 संपर्क मोटर मार्ग अवरुद्ध हो रखे हैं। चमोली जिले में मलारी हाईवे के बंद होने के कारण नीति घाटी के 16 गांवों के 400 ग्रामीण प्रभावित हुए हैं और उनको आवाजाही में भारी समस्या हो रही है। हाईवे बंद होने से नीती घाटी के तमक, जेलम, द्रोणागिरी, कागा, गरपक, जुम्मा, भापकुंड, कोषा, मलारी, कुरकुटी, महरगांव, बांपा, गमशाली और नीती गांव के भोटिया जनजाति के ग्रामीणों की आवाजाही ठप है।
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नीति घाटी में स्थित यह हाईवे सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम है और इसी हाईवे से सेना की जरूरतों की आपूर्ति की जाती है। हाईवे के बंद होने से चीन सीमा पर मुस्तैद सेना के जवानों की आवाजाही और जरूरी सामग्री की सप्लाई चिनूक के माध्यम से की जा रही है और जोशीमठ से चिनूक सामग्री लेकर सीमा क्षेत्र में पहुंचाया जा रहा है। बता दें कि मलारी हाईवे पर सुरांईथोटा और तमक गांव के बीच 14 अगस्त को चट्टान से भूस्खलन शुरू हुआ था। भूस्खलन इतना जबरदस्त था कि अबतक हाइवे खोला नहीं जा सका है। बीते रविवार को मौसम में स्थिरता आई और धूप खिलने से दोपहर के बाद चट्टान से पत्थरों के छिटकने का सिलसिला थमा तो बीआरओ की जेसीबी ने मलबा हटाने का काम शुरू किया। अगर मौसम ने साथ दिया तो कल तक हाईवे आवाजाही के लिए सुचारू कर दिया जाएगा।