देहरादून: ‘टाटा नमक होगा, देश का नमक...हमारा नमक तो पिस्यूं लूंण (पहाड़ी नमक) है’ सोशल मीडिया पर ये लाइनें अक्सर पढ़ने को मिल जाती हैं। पहाड़ी नमक के स्वाद को सिर्फ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इसे हम कंपलीट फूड कहें तो गलत नहीं होगा, शहरों में तो हम जैसे लोग पहाड़ी नमक के लिए तरस कर रह जाते हैं। आज हम आपको पिस्यूं लूंण के अलावा इस नमक से अपनी जिंदगी में मिठास भरने वाली महिलाओं की कहानी बताएंगे। इन महिलाओं ने ‘नमकवाली’ संस्था के माध्यम से सिलबट्टे में पिसे नमक को देश के कोने-कोने में पहुंचाने का बीड़ा उठाया है और ये सभी अपने मकसद में कामयाब भी हो रही हैं। देहरादून से शुरू हुई इस पहल से तमाम पहाड़ी महिलाएं जुड़ चुकी हैं और अपने बनाए खाद्य पदार्थों को बाजार में पहुंचा रही हैं। नमकवाली कंपनी मुख्य रूप से सिलबट्टे पर पिसा नमक तैयार करती है। इसकी खास बात यह है कि ये बिल्कुल नैचुरल व ऑर्गेनिक है। इसके अलावा कंपनी घी भी तैयार करती है।