Advertisement
No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
Example Ads Media
रुद्रप्रयाग: " अतिथि देवो भवः " यह बात केवल बड़े-बड़े पोस्टरों तक ही सीमित है क्योंकि धरातल की हक़ीक़त तो कुछ और ही बयां करती है। उत्तराखंड में बाहरी लोगों के साथ जिस तरह का रवैया सरकार अपना रही है वह बेहद शर्मनाक है। यह तो सब जानते ही होंगे कि केदारनाथ यात्रा का संचालन शुरू हो चुका है मगर केदारनाथ यात्रा करने वालों को आखिर किन मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, इसकी सच्चाई देख कर आप भी चौंक उठेंगे। उत्तराखंड में केदारनाथ यात्रा भले ही शुरू हो चुकी हो मगर कोविड के कारण सरकार ने रोजाना दिए जाने वाले पासों की न्यूनतम लिमिट तय की हुई है और चुनिंदा लोगों को ही पास मिलते हैं। ऐसे में बाहरी राज्यों से आने वाले लोग केदारनाथ के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। दोपहर 1 बजे केदारनाथ पहुंच रहे श्रद्धालुओं तक को पास नहीं मिल रहा है। बाहर से आने वालों के साथ प्रशासन बेहद अपमानजनक रवैया अपनाता हुआ दिख रहा है। देश के कोने-कोने से यात्री सैकड़ों मील की यात्रा तय कर इस कोविड के भय के बीच केदारनाथ दर्शन के लिए आना चाह रहे हैं मगर उनको रास्ते में ही रोक दिया जाता है। प्रशासन यह तक भूल जाता है कि यात्रा करने वालों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं.