Advertisement
भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
Example Ads Media
नैनीताल: प्रदेश में दो दिनों की बारिश से आई आपदा में 46 लोग अपनी जान गंवा बैठे। सैलाब और मलबे ने कई जिंदगियों को लील लिया। हालात जब बेकाबू होने लगे तो सेना के जवान देवदूत बनकर आए और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए। इन जवानों की बदौलत सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचा ली गई। वो सेना का आभार जताते नहीं थक रहे। आपदा के दौरान तुरंत बचाव कार्य में जुटने वाले जवानों ने एक बार फिर बता दिया कि एक फौजी हमेशा अपना कर्तव्य निभाता है। चाहे वो सरहद पर हो या फिर कहीं और, मगर देश के लिए उसका प्यार और जज्बा कभी कम नहीं होता। देश के भीतर जब किसी भी तरह की समस्या आती है तो यही फौजी देवदूत बन जाते हैं। कुमाऊं में भी सेना के जवान लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं। यहां नैनीताल में सेना की टुकड़ी ने 6 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 30 लोगों को बचाया। टनकपुर में सेना की मदद से 283 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इनमें 55 बच्चे भी शामिल थे।