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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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देहरादून: हरक सिंह रावत। उत्तराखंड की राजनीति का प्रमुख चेहरा। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने हरक सिंह रावत को बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिसके बाद हरक सिंह रावत कांग्रेस की शरण में पहुंचे। कांग्रेस ने हरक का साथ तो दिया लेकिन टिकट नहीं। इस तरह हरक इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सके।
चुनाव खत्म हो गया है, लेकिन हरक लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पिछले दिनों उनके गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने खबरें सोशल मीडिया पर छाई रहीं। हालांकि इन खबरों को पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना ही होगा, तो वो पौड़ी क्या हरिद्वार लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं। पार्टी जो भी भूमिका तय करेगी वो उसका निर्वहन करेंगे। पौड़ी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर हरक सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने इस बारे में फिलहाल कुछ नहीं सोचा है। हरक के मुताबिक इस संबंध में जो भी बातें कही जा रही हैं, वे निराधार हैं। हालांकि वो पौड़ी से ही नहीं बल्कि हरिद्वार से भी चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन ये तय करने का काम पार्टी संगठन का है। उनका ध्यान इस समय चुनावी राजनीति के बजाय पार्टी संगठन के साथ खड़े होकर पार्टी को मजबूत करने पर है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों से हरक सिंह रावत परेशान और दुखी नजर आए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर अक्सर फर्जी खबरें चलाई जाती हैं। चुनाव के समय भी ऐसी ही खबरें चलाई गईं कि वो कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं। इन्हीं फर्जी खबरों के चलते बीजेपी ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया, जबकि उनका बीजेपी छोड़ने का मन नहीं था। Harak Singh Rawat ने कहा कि वो अब चुनावी राजनीति की बजाय जनता के लिए धरातल पर काम करना चाहते हैं।