उत्तराखंड के 5 युवाओं ने 60 घंटे में पूरी की 368 Km रेस, देश के अंतिम गांव माणा में फहराया तिरंगा

हरिद्वार लक्सर के 5 युवाओं ने 368 किमी रेस 60 घंटे में पूरी की और देश के अंतिम गांव माणा में तिरंगा फहराया
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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haridwar mana youth tiranga: youth of Haridwar Luxor raced till Mana village
Image: youth of Haridwar Luxor raced till Mana village

हरिद्वार: लक्सर के पांच युवाओं के जज्बे को सलाम है। लक्सर के युवा धावकों ने 368 किलोमीटर का सफर महज 60 घंटे (पांच दिन) में पैदल तय कर उत्तराखंड के अंतिम गांव माणा पहुंचकर तिरंगा लहराया दिया है। उन्होंने 5 दिन पहले लक्सर तहसील के खानपुर ब्लॉक के दल्लावाला बॉर्डर से अपना सफर शुरू किया था और चुनौतीपूर्ण रास्तों का सामना करते हुए उन्होंने 5 दिन में देश के अंतिम गांव पर जाकर अपनी यात्रा पूर्ण की और तिरंगा लहराया। इन युवा धावकों ने मिसाल कायम की है। युवाओं ने 368 किलोमीटर का सफर 60 घंटे में पैदल तय कर देश के अंतिम गांव माणा पहुंचकर तिरंगा फहराया है टीम लीडर संजीव कुमार ने बताया कि उनका उद्देश्य एक बॉर्डर से दूसरे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के आखिरी गांव माणा जाकर तिरंगा लहराना था, जिसे उन्होंने 60 घंटे में पूरा कर लिया..बता दें, खानपुर क्षेत्र के 5 युवा धावक 27 मार्च की सुबह 6 बजे खानपुर के उत्तराखंड बॉर्डर के अंतिम गांव दल्लावाला बॉर्डर से उत्तराखंड के आखिरी गांव माणा के लिए निकले थे। आगे पढ़िए

उनकी टीम लीडर संजीव कुमार की अगुवाई में पूरा दल पैदल रवाना हुआ था। टीम में संजीव कुमार के अलावा दल में कशमिन्द्र, अंकित कुमार, अर्जुन सिंह, गुड्डू सिंह शामिल थे।टीम लीडर संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने लक्सर तहसील के खानपुर ब्लॉक के दल्लावाला बॉर्डर से लेकर राज्य और देश के अंतिम माणा गांव तक 368 किलोमीटर का सफर 60 घंटे में पैदल तय कर रिकार्ड बनाया है। उनका पहला पड़ाव ऋषिकेश का रोडवेज बस अड्डा, दूसरा देवप्रयाग के लक्षयाण गांव का शिव मंदिर, तीसरा गौचर का पुलिस थाना, चौथा हेल्ग का रैन बसेरा में हुआ। उनका उद्देश्य एक बॉर्डर से दूसरे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के आखिरी गांव माणा जाकर तिरंगा फहराना था और उन्होंने इस अभियान को 60 घंटे में पूरा कर लिया। बीते बृहस्पतिवार की शाम पांचों युवा धावकों का जत्था चमोली के आखिरी गांव माणा पहुंचा और तिरंगा फहराया।