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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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केंद्र और राज्य सरकार का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट। केंद्र सरकार ने साल 2016 में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। जिसका मकसद चारधाम यात्रा को सुखद बनाना है। ऑलवेदर रोड बनने के सुखद नतीजे मिलने लगे हैं। ऑलवेदर रोड के बनने से चारधाम की दूरी घटी है, जिससे चारधाम का सफर सुगम और सुखद बना है। पहले ऋषिकेश से चारधाम की दूरी (जाना और आना) 1528 किमी थी, जो अब घटकर 1508 किमी रह गई है। यात्रा रूट पर पुल निर्माण, सीधे मोड़ और सुरंग बनने से चारधाम की दूरी 20 किमी तक घट गई है। प्रोजेक्ट के तहत चारधाम यात्रा रूट के चौड़ीकरण का काम अब भी जारी है। एनएच श्रीनगर के ईई बलराम मिश्रा ने बताया कि रुद्रप्रयाग तक करीब 15 पुल बनाए गए हैं। जिससे ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग तक की दूरी आठ किमी घटी है। आगे पढ़िए
रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक भी दूरी एक किमी कम हुई है। ऋषिकेश से गंगोत्री-यमुनोत्री रूट पर चंबा तक काम पूरा हो चुका है। इसी तरह चंबा में सुरंग बनने से गंगोत्री की दूरी दो किमी कम हुई है। यमुनोत्री पर भी ब्रह्मखाल के पास सुरंग का काम जारी है। श्रीनगर में धारी देवी के पास बाईपास बन रहा है। इसके बन जाने से बदरी-केदार की दूरी नौ किमी और कम हो जाएगी। इस तरह Uttarakhand All Weather Road Project अपने मकसद में कामयाब होता दिख रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन का काम भी जारी है। इससे सफर और आसान हो जाएगा। रेललाइन बनने के बाद बदरीनाथ की दूरी 33 किमी घट जाएगी।
ऋषिकेश से जानकीचट्टी के बीच की दूरी 02 किमी घटी है।
गंगोत्री से गौरीकुंड के बीच की दूरी 10 किमी घटी है।
बदरीनाथ से ऋषिकेश के बीच की दूरी 08 किमी घटी है।