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Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
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कोटद्वार: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में जहां पर सबसे अधिक संख्या में भाग पाए जाते हैं कोटद्वार से रामनगर के बीच संचालित बस सेवा पर सुप्रीम कोर्ट ने वापस से रोक लगा दी है।
दरअसल कोर्ट ने राज्य सरकार और वन विभाग के ऊपर नाराजगी व्यक्त की है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार से अगली तारीख तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र (बाघ प्रजनन क्षेत्र) में बस सेवा की अनुमति देने के लिए राज्य सरकार के कदम पर भी सवाल उठाया है। इस मामले में अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने बस सेवा पर रोक लगाने के लिए याचिका दाखिल की थी जिसमें उन्होंने यह तर्क दिया था कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व कोर एरिया में उत्तर भारत में बाघों की सबसे बड़ी तादाद है। इसे बाघ आबादी का शीर्ष प्राथमिक क्षेत्र माना गया है।
ऐसे में बस संचालन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 38 (ओ) और धारा 38 (वी) जैसे विभिन्न प्रावधानों के खिलाफ तो है ही बल्कि शीर्ष अदालत की ओर से जारी किए गए आदेशों के खिलाफ भी है। इस मामले में सरकार और वन विभाग ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से किसी तरह की नहीं मंजूरी ली। दरअसल इस क्षेत्र में गढ़वाल मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड की एक बस कोटद्वार से रामनगर के बीच एक दिन में दो चलती है। गढ़वाल को कुमाऊं से जोड़ने वाली इस बस सेवा का संचालन 70 के दशक से हो रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर जोन से गुजरते हुए यहां स्थानीय लोग सिर्फ प्रकृति का आनंद लेते हैं। वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने इस बस सेवा पर रोक लगा दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया लेकिन, अब पुन: सुप्रीम कोर्ट ने बस सेवा पर रोक लगा दी है।