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Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
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हरिद्वार: परिस्थितियों को अपनाने की नहीं उनको बदलने की आग दिल में रखने वाले ही ज़िंदगी में कुछ कर पाते हैं।
किस्मत को कोसना तो बेहद आसान है, मगर चुनौतीपूर्ण तो यह है कि किस्मत को बदला जाए। इसी का जीता जागता उदाहरण है हरिद्वार की 28 वर्षीय रूपा जो कि अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं और ई रिक्शा चला कर अपने बच्चों को पाल रही हैं। रूपा ने यह नहीं देखा कि समाज उसके बारे में क्या सोचेगा। उसने यह भी नहीं देखा कि जब एक औरत सड़क पर काम करेगी तो 4 लोग क्या कहेंगे। उसने बस अपने परिवार को देखा, अपने बच्चों को देखा और अपनी परिस्थितियों को देखा और अपने हालातों को बदलने का दृढ़ निश्चय लेते हुए उसने ई रिक्शा चलाने का फैसला लिया। हरिद्वार की 28 साल की रूपा पिछले 8 महीने से ई-रिक्शा चला कर अपने परिवार का लालन-पालन कर रहीं है। उसका पति शराबी था और मारपीट करता था इसलिए रूपा ने अलग रहने का फैसला किया।
रूपा उन महिलाओं के लिए जीता जाता उदाहरण है जो कि अपने किस्मत और अपने हालातों को अपनाकर तमाम दुखों और पीड़ा के साथ जिंदगी जी रही हैं। हरिद्वार में करीब 14-15 सालों से रह रही महदूद निवासी रूपा की उम्र 28 वर्ष है। उनके तीन बच्चे है। रूपा अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए हर रोज 10 से 12 घंटे ई-रिक्शा चलाती हैं। रूपा यहां किराये के मकान में रहती हैं। अपने परिवार का भरण पोषण करने के अलावा उन्हें इसी आमदनी में से कमरे का किराया और रिक्शा का किराया भी देना पड़ता है। रूपा ने बताया कि उन्हें अपने पति से अलग हुए करीब पांच साल हो चुके हैं। उसका पति दारू पीकर उसके साथ मारपीट किया करता था और उसी वजह से रुपा ने अपने पति से अलग होने का फैसला लिया। रूपा को ई-रिक्शा चलाता देख हर कोई हैरान रह जाता है और लोग उनकी हिम्मत और जज्बे की खूब तारीफ करते हैं।