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केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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चमोली: अगर आप भी उत्तराखंड के चमोली में जाने का प्लान बना रहे हैं तो जरा सावधान हो जाइए। उत्तराखंड में मौसम के तेवर अलग चल रहे हैं।
चमोली जनपद के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रुक-रुककर बर्फबारी का सिलसिला जारी है। वहीं बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, फूलों की घाटी नीती और माणा घाटियों में सुबह आठ बजे तक हल्की बर्फबारी हुई है।अभी मौसम सामान्य है, लेकिन दोपहर बाद फिर से मौसम खराब होने की संभावना बनी हुई है। वहीं मौसम विभाग ने चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अगले 24 घंटे में एवलांच आने की चेतावनी दी है। इस को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी सतर्क हो गए हैं। नंद किशोर जोशी ने बताया कि आपदा से जुड़े अधिकारियों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। आगे जानिए एवलॉन्च क्या होता है।
क्या होता है एवलांच- एवलांच पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक बर्फबारी की वजह से होता है। जब ऊंची चोटियों पर ज्यादा मात्रा में बर्फ जम जाती है तो दबाव ज्यादा होने पर बर्फ अपनी जगह से खिसक जाती है। बर्फ की परतें खिसकती हैं और तेज बहाव के साथ नीचे की ओर बहने लगती हैं। रास्ते में जो कुछ आता है, उसे भी ये बहा ले जाती हैं। वहीं केदारनाथ की बात करें तो केदारनाथ में मार्च में तीन फीट से अधिक नई बर्फ गिरी है। अप्रैल माह के पहले दिन भी बर्फबारी हुई है। यहां 16 से 31 मार्च तक लगातार बर्फ गिरी है। इस दौरान यहां लगभग तीन फीट नई बर्फ गिर चुकी है। जिस वजह से तमाम पैदलमार्ग बाधित हो रखे हैं। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी रामबाड़ा से केदारनाथ तक नौ किमी क्षेत्र में बर्फ जमी है। कुल मिलाकर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और जगह-जगह पर बर्फबारी और बरसात की वजह से लोगों को आवाजाही में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।