उत्तराखंड: मसूरी-नैनीताल के बाद पर्यटकों की पहली पसंद बनी ये जगह, अंग्रेजों ने इसे बसाया था

अंग्रेजों का बसाया हुआ वो शहर, जहां अंग्रेजों की एंट्री है बैन, भारतीयों की आमद से खिल रहा है चकराता..पढ़िए पूरी खबर
Advertisement हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम

पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।

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Chakrata Hill Station Uttarakhand: Tourists liked chakrata hill station after nainital mussoorie
Image: Tourists liked chakrata hill station after nainital mussoorie

देहरादून: उत्तराखंड की नैसर्गिक सुंदरता की बात ही कुछ और है मगर आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और ऐतिहासिक और पारंपरिक दृष्टि से भी यह शहर अहम स्थान रखता है।

Chakrata Hill Station Uttarakhand

हम बात कर रहे हैं चकराता की जिसको आजादी के समय अंग्रेजों ने स्थापित किया था। मगर आलम कुछ यूं है कि इस समय चकराता में अंग्रेजों की एंट्री पर प्रतिबंध है। जी हांयहां पर विदेशी पर्यटकों की नो एंट्री है और केवल भारतीय , पर्यटक ही यहां के नैसर्गिक सुंदरता का और पर्यटक स्थलों का आनंद ले सकते हैं। नैनीताल-मसूरी के बाद पर्यटकों को चकराता खूब भा रहा है। जौनसार-बावर का प्रमुख नगर या कहें मुख्यालय चकराता, यह ब्रिटिश काल में बसाया गया महत्वपूर्ण कैंट है। चकराता उत्तराखंड के उन चंद बेहद खूबसूरत क्षेत्रों में से है, जो अपनी नैसर्गिक सुंदरता के साथ ही अपनी लोक परंपराओं और संस्कृति के कारण देश-दुनिया को अपनी ओर खींचते हैं। समुद्र तल से 2118 मीटर की ऊंचाई पर यमुना और टोंस नदी के बीच चकराता 1866 में बसाया गया था। ब्रिटिश सरकार ने 1869 में इसे कैंट बोर्ड के अधीन किया। आगे पढ़िए

चकराता में स्थित झील-झरने और सुंदर वादियां देश के अलग-अलग हिस्सों में रहे लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचती हैं। यही नहीं, विदेश में भी रहने वाले लोग इस गांव की यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन वे इसकी सुंदरता को निहार नहीं पाते हैं। बीते कुछ वर्षों में विदेशी सैलानियों ने बाइक टूर के दौरान इस गांव से भी गुजरने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कभी भी इस गांव से नहीं गुजरने दिया। उत्तराखंड का चकराता भारतीय सेना का मिलिट्री बेस बना हुआ है। वहीं, यहां से चीन की दूरी भी बहुत कम है। साल 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के बाद यहां पर तिब्बती यूनिट जमा हुई थी। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से यहां पर किसी भी विदेशी सैलानी को प्रवेश नहीं दिया जाता है। केवल भारतीय लोग यहां पर जा सकते हैं। वहीं गर्मी से राहत पाने के लिए पर्यटक इन दिनों अपना रुख पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर कर रहे हैं। शुक्रवार शाम को यहां भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे, जिससे जाम की स्थिति बन गई। घंटों तक पर्यटक जाम में फंसे रहे। छावनी बाजार गुलजार हो गया। चकराता छावनी बाजार के शहीद चौक से लेकर चुंगी तक और गुरुद्वारा चौक तक पर्यटकों का जमावड़ा देखने को मिला।
चकराता में कहां घूम सकते हैं?
टाइगर फॉल्स- यहां पहुंचने पर आपको 100 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाला टाइगर फॉल भी देखने को मिल जाएगा। हालांकि, यहां तक पहुंचने के लिए आपको करीब 6 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। क्योंकि, टाइगर फॉल तक किसी भी प्रकार का कोई वाहन नहीं जाता है। इसके अलावा चकराता से चार किमी की दूरी तय कर चिरमिरी पहुंच आपको सूर्यास्त का सुंदर नजारा भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा आप चिलमरी नेक, देवबन बर्ड वाचिंग, जमुना एडवेंचर पार्क मुंडाली, किमोना जलप्रपात इत्यादि का लुत्फ भी उठा सकते हैं।