Rishikesh karnprayag rail project को पहाड़ के विकास का पर्याय बताया जा रहा है, लेकिन यह रेल लाइन कई गांवों के लिए अभिशाप साबित हो रही है।
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कोमल नेगी
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Image: Rishikesh karnprayag rail tunnel blasting cracks in many houses
चमोली: उत्तराखंड में चल रही बड़ी परियोजनाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। यहां सड़कों और रेल मार्ग के निर्माण के लिए पहाड़ों का सीना छलनी किया जा रहा है, जिससे कई गांवों में मकानों में दरारें पड़ गई हैं।
Rishikesh karnprayag rail tunnel blast cracks in houses
कभी श्रीनगर गढ़वाल के तोल्यूं क्षेत्र से मकानों में दरारों की खबर आती है, कभी रुद्रप्रयाग के नरकोटा से दरारों की खबर आती है। अब एक ऐसी ही डराने वाली तस्वीर चमोली जिले से आई है। जहां सूगी ग्राम पंचायत में कई आवासीय मकानों में भारी दरारें आ गई हैं, जिससे ये सभी मकान खतरे की जद में हैं। ग्रामीण इसके लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन परियोजना को जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका कहना है कि रेल लाइन के लिए टनल निर्माण के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटकों का प्रयोग हो रहा है। जिससे सूगी, क्यार्खू में कई आवासीय मकानों में दरारें पड़ गई हैं। इन मकानों में रहने वाले लोग डरे हुए हैं। दहशत की वजह से वो रात-रातभर सो नहीं पाते। आगे पढ़िए
Rishikesh karnprayag rail project
गांव में रहने वाले लक्ष्मण सिंह व सुभाष खत्री ने बताया कि दरारों की वजह से उनके मकान की सीढ़ी भी ध्वस्त हो गई। इस बारे में प्रशासन को सूचना दी गई है। प्रशासन को प्रभावितों के पुनर्वास के इंतजाम करने चाहिए, साथ ही नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें मुआवजा भी देना चाहिए। राजस्व उप निरीक्षक राजेश कुमार गोरखा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। इस संबंध में निर्माणदायी संस्था को सूचना दी जा चुकी है। रेलवे कम्पनी के द्वारा एक बार सूगी ग्राम में प्रभावित मकानों की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। इससे पहले रुद्रप्रयाग बता दें कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को पहाड़ के विकास के लिए मील का पत्थर कहा जा रहा है लेकिन यह रेल लाइन कई गांवों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। रेल लाइन के निर्माण के चलते रुद्रप्रयाग का मरोड़ा गांव भी भू-धंसाव की चपेट में है।