उत्तराखंड में शिक्षा का ये हाल है, 70 साल पुराने स्कूल की 5 कक्षाओं में सिर्फ एक शिक्षक

Almora school teacher problem ये स्कूल 70 साल पुराना है। हम बात कर रहे हैं विकासखंड धौलादेवी के प्राथमिक स्कूल चमुवा की।
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Almora school teacher problem: Only 1 teacher in Almora Primary School Chamuva
Image: Only 1 teacher in Almora Primary School Chamuva

अल्मोड़ा: उत्तराखंड में बच्चों को कड़ी मशक्कत के बाद शिक्षा का अवसर मिलता है। स्कूलों की डगर कठिन है, लेकिन फिर भी बच्चे हिम्मत नहीं हारते।

Teacher problem in Primary School Chamuva Almora

मगर शिक्षा व्यवस्था की हालत इतनी खराब है कि उत्तराखंड के कई स्कूलों में तो मात्र 3-4 शिक्षक ही पूरा स्कूल संभाल रहे है। अब अल्मोड़ा के एक प्राथमिक स्कूल को ही देख लीजिए। यहां शिक्षकों की भारी कमी है। खास बात ये है कि ये स्कूल 70 साल पुराना है। हम बात कर रहे हैं विकासखंड धौलादेवी के प्राथमिक स्कूल चमुवा की। यहां पर कुल पांच कक्षाओं में महज एक ही अध्यापक है। जी हां, यह बात बड़ी शॉकिंग है कि उत्तराखंड में किस प्रकार ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस संबंध में अभिभावकों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात की। साथ ही उन्हें विद्यालय में शिक्षकों की कमी के बारे में बताया। अभिभावकों ने जल्द से जल्द विद्यालय में कम से कम एक और शिक्षक की नियुक्ति किए जाने की मांग उठाई। आगे पढ़िए

शिष्टमंडल ने डीईओ को बताया कि स्कूल में एक मात्र शिक्षक के होने से बच्चों को शिक्षा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। डीईओ को बताया कि इस विद्यालय में वर्तमान में कई छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, मगर पांच कक्षाएं और एक ही शिक्षक के होने से सभी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। कभी-कभार आवश्यक कार्यवश शिक्षक के अवकाश में जाने पर विद्यार्थियों की समस्या और बढ़ जाती है। कुल मिलाकर बात यह है कि राज्य गठन के 22 सालों के बाद भी उत्तराखंड विकास के कई पैमानों पर अन्य राज्यों की अपेक्षा पिछड़ा हुआ है। विशेषकर इसके दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्र अब भी विकास की लौ से वंचित हैं। खासकर की शिक्षा जोकि एक बच्चे की जिंदगी का आधार है और जिसकी वजह से ही बच्चे नए नए आयाम हासिल करते हैं। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में यह बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित हैं। स्किल्स तो बहुत दूर की बात है, उनको ढंग से शिक्षक तक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों का भविष्य जिस ओर बढ़ रहा है, वह राह खतरनाक है।