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चमोली: फूलों की घाटी में इन दिनों रंगों और सुगंध की छटा बिखर रही है। फूलों की घाटी में हिमालय की रानी के नाम से प्रसिद्ध ब्लू पॉपी भी खिल गई है।
विदेशी सैलानियों को ये फूल खूब आकर्षित कर रहा है। ब्लू पॉपी जुलाई-अगस्त में हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में खिला दिखाई देता है। यह फूल उत्तराखंड में चार दशक पहले जापान से आया था। इसके जापान से उत्तराखंड के पहाड़ों पर पहुंचने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। साल 1986 तक यह फूल घाटी में नजर नहीं आता था। इसी साल जापान से चो बकांबे फूलों पर शोध करने के लिए उत्तराखंड आए, और इस दौरान उन्होंने घाटी में ब्लू पॉपी के बीज बिखेर दिए। तीन साल बाद जब वो दोबारा उत्तराखंड लौटे तो घाटी में ब्लू पॉपी के फूल नीली रंगत बिखेर रहे थे। दुनिया में इसकी 40 प्रजातियां मौजूद है। जिसमें से 20 भारत में ही पाई जाती हैं।
इस खूबसूरत फूल को देखने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी लोग चमोली पहुंच रहे हैं। खासकर जापानी टूर ऑपरेटर घांघरिया और जोशीमठ के होटल कारोबारियों से संपर्क कर घाटी के टूर की बुकिंग करवा रहे हैं। इन दिनों घाटी में पोटेंटिला, जिरेनियम, एनिमोना, स्नेक लिली समेत कुल 25 से अधिक प्रजाति के फूल खिल रहे हैं। अगर आप भी धरती के इस स्वर्ग का दीदार करना चाहते हैं तो तुरंत बैग पैक कर चले आइए। फूलों की घाटी जाने के लिए आपको चमोली के गोविंदघाट पहुंचना होगा। इसके लिए आप देहरादून-ऋषिकेश से बस या टैक्सी कर सकते हैं। गोविंदघाट से फूलों की घाटी पहुंचने के लिए 19 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। भ्यूंडार और घांघरिया होते हुए आप फूलों की घाटी पहुंच सकते हैं। समुद्र तल से 12500 फीट पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली फूलों की घाटी Valley of Flowers Trek जैव विविधता का खजाना है। जहां पर दुनिया के दुर्लभ प्रजाति के फूल खिलते हैं। विश्व धरोहर फूलों की घाटी एक जून से पर्यटकों के लिए खोल दी गई है, आप यहां अक्टूबर तक विजिट कर सकते हैं।