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भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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चम्पावत: मान लीजिए कि आप की रात की 9 बजे की ट्रेन है। आप अपने पूरे परिवार के साथ सामान बांधकर ट्रेन में बैठे हैं। 9 बजते ही ट्रेन चल जाती है मगर आपका कोच नहीं हिलता।
आप देखते हैं कि ट्रेन का इंजन दूर जा चुका है मगर आपका कोच वहीं का वहीं प्लैटफॉर्म पर खड़ा हुआ है। ऐसे में आप की क्या हालत होगी। जी नहीं यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है बल्कि ऐसा सच में हुआ है। दरअसल रेलवे आजकल गलतियों पर गलतियां कर रहा है। कभी ट्रेन को समय से पहले रवाना कर देता है तो कभी यात्रियों को लिए बिना ही सफ़र शुरू कर देता है। अब रेलवे स्टेशन टनकपुर से सोमवार को त्रिवेणी एक्सप्रेस का इंजन बिना डिब्बों के ही पटरी पर दौड़ गया। ट्रेन चालक जाने किन ख्वाबों में था कि बिना डिब्बों के ही इंजन पटरियों पर दौड़ा दिया। ट्रेन की रवानगी के बाद उसमें सवार यात्रियों व अधिकारियों को जब इसकी जानकारी हुई तो हड़कंप मच गया। आगे पढ़िए
वहीं चालक को देर तक इसका एहसास नहीं हुआ। स्टेशन से तीन किमी बिचई कमलपथ के पास पहुंचने पर चालक को इंजन में डिब्बे न जुड़े होने का आभास हुआ, जिसके बाद इंजन को वापस स्टेशन लाया गया। दरअसल टनकपुर रेलवे स्टेशन से त्रिवेणी एक्सप्रेस सुबह 8:35 बजे गंतव्य को रवाना होती है। सोमवार को ट्रेन का इंजन नियत समय पर गंतव्य को रवाना हो गया, लेकिन कोच पीछे छूट गए। चालक तीन किमी दूर बिचई से कुछ आगे कमल पथ पहुंचा तो उसे इंजन में डिब्बे न लगे होने का अहसास हुआ। उनके इंजन रोककर देखा तो होश उड़ गए। आनन-फानन में चालक इंजन को वापस रेलवे स्टेशन लाया। वहीं इंजन के ट्रेक पर आगे बढऩे की खबर के बाद रेलवे के अधिकारियों के भी हाथ पांव फूल गए। इंजन के वापस लौटने पर सभी ने राहत की सांस ली। गनीमत रही कि किसी तरह की हानि नहीं हुई।