देहरादून का वो प्राचीन मंदिर, जहां ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति के लिए लक्ष्मण ने किया कठोर तप

Dehradun Laxman Siddh Temple भगवान लक्ष्मण पर लगा था ब्राह्मण हत्या का दोष, देहरादून के इस मंदिर में की थी कठोर तपस्या, जानें लक्ष्मण सिद्ध मंदिर का संक्षिप्त इतिहास
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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Dehradun Laxman Siddh Temple: Story of Dehradun Laxman Siddh Temple
Image: Story of Dehradun Laxman Siddh Temple

देहरादून: उत्तराखंड के पौराणिक मंदिरों की बात ही कुछ और है। यहां के मंदिरों की खूबसूरती के साथ साथ ही इतिहास में भी उनका वर्णन हो रखा है जो कि उत्तराखंड के मंदिरों को सबसे अलग बनाते हैं।

Story of Dehradun Laxman Siddh Temple

प्रकृति के बीच स्थित यह मंदिर अपने होने का प्रमाण देते हैं, इतिहास का प्रमाण देते हैं और उन काल का प्रमाण देते हैं जिनके बारे में कल्पना करना भी हमारे लिए मुश्किल है। उत्तराखंड के कई मंदिर ऐसे हैं जिनका जिक्र रामायण और महाभारत तक में हो रखा है और जिनका संबंध सीधे सीधे तौर पर इन से जुड़ा हुआ है। राज्य समीक्षा समय-समय पर आपको उत्तराखंड के ऐसे ही मंदिरों की वर्चुअल सैर कराता है। यह सीरीज लंबे समय से चली आ रही है और अब तक हमारी वेबसाइट पर आपने कई मंदिरों के बारे में और उनसे जुड़ी परंपराओं इतिहास और उनके रीति रिवाजों के बारे में जाना है। आज हम आपको देहरादून के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका संबंध सीधे तौर पर रामायण से है और यह आज भी अस्तित्व में है। हम बात कर रहे हैं लक्ष्मण सिद्ध मंदिर की। राजधानी देहरादून में 4 सिद्ध मंदिर या पीठ हैं और यह शहर के 4 कोनों में स्थापित हैं। देहरादून के 4 सिद्धों में लक्ष्मण सिद्ध, कालू सिद्ध, मानक सिद्ध और मांडु सिद्ध हैं। देहरादून का लक्ष्मण सिद्ध मंदिर ऋषि दत्तात्रेय के चौरासी सिद्धों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि रावण के वध के बाद में ब्रह्म हत्या का दोष हटाने के लिए और उससे मुक्ति पाने के लिए भगवान लक्ष्मण यहां पर आए थे और उन्होंने तपस्या की थी। आगे पढ़िए

ब्राह्मण हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने यही कठोर तप किया था। भगवान दत्तात्रेय ने लोककल्याण के लिए अपने 84 शिष्य बनाये थे और उन्हें अपनी सभी शक्तियां प्रदान की थी। कालांतर में ये चौरासी शिष्य 84 सिद्ध के नाम से जाने गए और इनके समाधि स्थल सिद्धपीठ या सिद्ध मंदिर बन गए। इन्ही 84 सिद्धों में देहरादून के चार सिद्ध भी हैं और इन चारों में लक्ष्मण सिद्ध भी हैं। भगवान राम के अनुज लक्षमण ने, रावण और मेघनाथ की ब्राह्मण हत्या के पाप से बचने के लिए इस स्थान पर तपस्या की थी। यह मंदिर या सिध्पीठ देहरादून से मात्र 13 किलोमीटर की दूरी बहुत ही शांत एवं सुंदर वातावरण में घने जंगलों के बीच स्थित है। यह सिद्धपीठ देहरादून ISBT से 12 किलोमीटर की दूरी पर हरिद्वार NH 72 हाईवे पर स्थित है | यह मंदिर अपने धार्मिक महत्व के लिए और सुंदर सौंदर्य के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। देहरादून का लक्ष्मण सिद्ध मंदिर देहरादून शहर से 13 किलोमीटर दूर हरिद्वार ऋषिकेश रोड पर स्थित है। आप हर्रावाला तक बस या टैक्सी द्वारा लक्ष्मण सिद्ध मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं जिसके बाद मंदिर तक 1 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। कहते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। हर रविवार को यहाँ भक्तों की भीड़ लगी रहती है। अगर आप भी देहरादून के आसपास रहते हैं तो आप मन की शांति के लिए अपने परिवार और प्रिय जनों के साथ में इन मंदिरों (Dehradun Laxman Siddh Temple) में दर्शन करने आ सकते हैं। उत्तराखंड के तमाम मंदिरों और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं एवं परंपराओं को हम अब तक पहुंचाते रहेंगे। आप हमारी वेबसाइट पर उत्तराखंड के पौराणिक मंदिरों से जुड़ी कई अन्य जानकारियां भी हासिल कर सकते हैं।