अब देहरादून में कर्मचारियों को जहरीली गैस से नहीं गंवानी पड़ेगी जान, देहरादून के मेनहोल की सफ़ाई करेगा रोबोट
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अनुष्का ढौंडियाल
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Image: Squeezing Machine Will Clean Manhole in Dehradun
देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून में अब सीवर लाइन के मेनहोल की सफाई करने वाले इंसान नहीं रोबोट के तौर पर दिखेंगे।
Squeezing Machine Will Clean Manhole in Dehradun
जी हां, अब तक सीवर की सफाई करने के लिए कोई भी हाईटेक सुविधा नहीं थी और कर्मचारियों को ही मजबूरन सीवर के में घुस में घुसकर सफाई करनी पड़ती थी। उस वजह से उनकी जान के ऊपर भी एक बड़ा रिस्क रहता था। ऐसे में इस काम के लिए अब रोबोट को चुना गया है जो कि इंसानों की जगह सीवर के मेनहोल में घुसकर सफाई करेंगे। अब कर्मचारियों को जहरीली गैस से जान नहीं गंवानी पड़ेगी। जल संस्थान अब राजधानी में रोबोटिक स्किविजिंग मशीन लाने जा रहा है। इस मशीन को केरल के युवाओं की स्टार्टअप कंपनी ने बनाया है। इसे कहीं लाना-ले जाना भी आसान होगा। जी हां, जल संस्थान की साउथ डिवीजन की ओर से रोबोटिक सीवर क्लीनिंग मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अधिशासी अभियंता आशीष भट्ट ने बताया कि यह ऐसी मशीन है जो सीधे सीवर के मेनहोल पर ले जाएगी। इसके बाद मशीन की भुजाओं वाला हिस्सा भीतर चला जाएगा, जिसमें लगे कैमरे भीतर की लाइव स्थिति बाहर स्क्रीन पर दिखाएंगे।
इसकी मजबूत भुजाएं आसानी से उस गंदगी को बाहर निकालकर ले आएंगी, ताकि मेनहोल साफ़ हो जाए और सीवर आगे बढ़ जाए। बता दें कि अभी तक सीवर मेनहोल के माध्यम से कर्मचारी या तो बांस घुसाकर पानी खोलते हैं या फिर खुद भीतर घुसकर मेनहोल की गंदगी बाहर निकालते हैं।प्रदेश में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब मेनहोल में मौजूद जहरीली गैस की वजह से कर्मचारियों की मृत्यु तक हो गई। मशीन आने के बाद उनका जीवन सुरक्षित होगा। यह मेनहोल क्लीनिंग रोबोट हर किस्म में खास है। इसमें 36 कैमरे लगे हुए हैं, जो सीवर लाइन के भीतर गहराई से जाकर गंदगी जमा होने की सही लोकेशन स्क्रीन पर दिखा सकते हैं।इससे ये भी आसानी से पता चल सकेगा कि कहां कचरा, पत्थर या रेत फंसने की वजह से सीवर लाइन बंद है। इन रोबोट की भुजाएं 80 फीट गहराई में भी कचरे को निकालकर बाहर ला सकती हैं। वर्तमान में देश के करीब 20 राज्यों में इस मशीन से मेनहोल की सफाई की जा रही है और सालों से चले आ रहे इंसानों के द्वारा मैनहोल की सफ़ाई करने वाले मेथड को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है जो कि सराहनीय है।