उत्तराखंड में बार-बार वॉर्निंग दे रही है कांपती धरती, भूकंप के लिहाज से कई जिले डेंजर जोन में

उत्तराखंड का ज्यादातर इलाका भूकंप के लिहाज से जोन चार और पांच में है। कई जिले लॉक जोन में हैं, जो कि चिंताजनक बात है। आगे पढ़िए खास रिपोर्ट
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Uttarakhand Earthquake Danger Zone: Earthquake Danger Zone in Uttarakhand
Image: Earthquake Danger Zone in Uttarakhand

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं।

Earthquake Danger Zone in Uttarakhand

मंगलवार को नेपाल में आए भूकंप का असर देहरादून, टिहरी, श्रीनगर, उत्तरकाशी और पूरे कुमाऊं मंडल में महसूस किया गया। इस दौरान करीब पांच सेकेंड तक धरती हिलती रही। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 रही। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने 6 मैग्नीट्यूट के आसपास आए भूकंप को धरती के नीचे चल रही हलचल के लिहाज से पॉजिटिव माना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि छोटे भूकंप आने से जमा ऊर्जा बाहर निकल जाती है, जिससे बड़े भूकंप का खतरा टल जाता है। नेपाल में आए ताजा भूकंप के बाद देहरादून के हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने भूकंप की रीयल टाइम मॉनीटरिंग शुरू कर दी थी। कंट्रोल रूम के मुताबिक उत्तराखंड में सिर्फ दो ही झटकों का कंपन महसूस किया गया। पहला झटका 2 बजकर 25 मिनट पर महसूस किया गया, इसकी तीव्रता भूकंप के केंद्र में 4.9 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई।

वहीं उत्तराखंड में दूसरा झटका 2 बजकर 51 मिनट पर महसूस हुआ। इसकी तीव्रता केंद्र में 5.7 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई है। वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक कालाचंद सेन के मुताबिक इंडियन और यूरेशियन प्लेट के टकराने के प्रभावों का जीपीएस के माध्यम से अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि धरती के नीचे बड़ी मात्रा में एनर्जी स्टोर हो गई है। धरती के नीचे जमा एनर्जी का धीरे-धीरे निकलना जरूरी है, वरना यह बड़े भूकंप का खतरा पैदा कर देगी। चिंता वाली बात ये है कि प्रदेश के कई जिले लॉक जोन में हैं, जिस वजह से यहां पर एनर्जी बाहर नहीं निकल पा रही। कम तीव्रता के भूकंप से एनर्जी स्टोरेज कम होगा, तो बड़े भूकंप का खतरा टल जाएगा। हालांकि प्रदेश में बड़े भूकंप का खतरा भी बना हुआ है, लेकिन यह कब आएगा, कहा नहीं जा सकता। उत्तराखंड का ज्यादातर इलाका भूकंप के लिहाज से जोन चार और पांच में हैं। इसलिए बार-बार भूकंप की घटनाएं देखने को मिल रही हैं.