अगस्त से सितंबर माह तक गुलदार 13 दोपहिया वाहन चालकों पर झपट्टा मार चुका है। तब से ट्रैंकुलाइज टीम यहां मोर्चा संभाले हुए है, लेकिन गुलदार न जाने कहां गायब हो गया है।
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कोमल नेगी
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Image: Fear of leopard on Champawat Tanakpur Highway
चम्पावत: उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों की तरह चंपावत में भी गुलदार दहशत का सबब बने हुए हैं।
Fear of leopard on Champawat Tanakpur Highway
यहां एक गुलदार टनकपुर-चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन सवारों पर हमला कर रहा था। एक के बाद एक कई शिकायतें मिलने के बाद गुलदार को ट्रैंकुलाइज करने की कोशिशें शुरू हुईं, लेकिन सफलता अब तक नहीं मिली है। हमलावर गुलदार को 20 दिन बाद भी ट्रेंकुलाइज नहीं किया जा सका है। नेशनल हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों ने कई बार गुलदार के दिखने की बात कही है, लेकिन वन विभाग को अब तक गुलदार की लोकेशन नहीं मिली है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा गुलदार को ट्रैंकुलाइज करने की अनुमति देने के बाद 26 सितंबर से टीम संबंधित क्षेत्र में डटी हुई है। 28 सितंबर को गुलदार को डोज भी दे दी गई थी, लेकिन गुलदार जंगल में भाग गया।
रेंजर गुलजार हुसैन ने बताया कि गुलदार को पकड़ने के लिए वन विभाग ने क्षेत्र में तीन पिंजरे और आठ कैमरा ट्रैप भी लगाए हैं, लेकिन गुलदार पिंजरे में कैद नहीं हो पा रहा है। विभाग लगातार पिंजरों की लोकेशन भी बदल रहा है, पर गुलदार अचानक नदारद हो गया है। टनकपुर-चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूखीढांग से लेकर आठवें मील तक गुलदार को ट्रेंकुलाइज करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। बता दें कि अगस्त से सितंबर माह तक गुलदार 13 दोपहिया वाहन चालकों पर झपट्टा मार चुका है। सौभाग्य से इन हमलों में किसी की जान नहीं गई। तब से ट्रैंकुलाइज टीम मोर्चा संभाले हुए है, लेकिन गुलदार न जाने कहां गायब हो गया है, उसकी लोकेशन नहीं मिल रही। 28 से 30 सितंबर तक वाहन चालकों को गुलदार दिखाई दिया था, लेकिन अब उन्हें भी गुलदार नहीं दिख रहा है।