नैनीताल में सिर्फ एक मदरसा रजिस्टर्ड है। जबकि यहां हल्द्वानी, नैनीताल और रामनगर में कई मदरसे चल रहे हैं।
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कोमल नेगी
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Image: Illegal madrassas at many places in Uttarakhand
नैनीताल: उत्तराखंड में अवैध रूप से चल रहे मदरसे छात्रों के शोषण का अड्डा बन गए हैं।
Illegal madrassas in Uttarakhand
बीते दिनों नैनीताल में एक अवैध मदरसे का खुलासा हुआ, जहां मासूमों को अश्लील वीडियो दिखाकर उनका यौन शोषण किया जा रहा था। बच्चे बुरी हालत में रह रहे थे, कई बच्चे बीमार भी थे। इस मामले के बाद प्रदेश के मदरसों का सर्वेक्षण शुरू किया गया, जिसमें चौंकाने वाली बात पता चली है। रिपोर्ट में पता चला कि नैनीताल जिले में सिर्फ मदरसा सिराजुल उलूम नूरिया मोहम्मद गुलर घट्टी, रामनगर ही एक मात्र उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद, देहरादून से पंजीकृत है। इसका मतलब साफ है कि अन्य मदरसे अवैध रूप से चल रहे हैं। रिपोर्ट में ये भी पता चला कि पूरे प्रदेश में करीब आठ सौ गैर मुस्लिम बच्चे पढ़ रहे हैं। दावा है कि गैर मुस्लिम बच्चे अभिभावकों की इच्छा से पढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में ऐसे 30 मदरसे हैं, जो कि मदरसा शिक्षा परिषद से पंजीकृत हैं। इनमें 7399 बच्चे पढ़ रहे हैं।
नैनीताल में सिर्फ एक मदरसा रजिस्टर्ड है। जबकि यहां हल्द्वानी, नैनीताल और रामनगर में भी मदरसे चल रहे हैं। इनकी फंडिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। ये साफ नहीं है कि ये किस फंड से संचालित हो रहे हैं। नैनीताल के वकील नितिन कार्की ने कहा कि जिले में नैनीताल, हल्द्वानी में अवैध रूप से कई मदरसे चल रहे हैं। इनका सोसाइटी एक्ट में भी पंजीकरण रिनुअल नहीं हुआ है। सोसाइटी एक्ट से मजहबी शिक्षा नहीं दी सकती। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासन को इसकी जांच करनी चाहिए। बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में मदरसों का सर्वेक्षण कराया गया था। मदरसा शिक्षा परिषद की रिपोर्ट के अनुसार जिले के रामनगर के गुलर घाटी में एकमात्र मदरसे में 113 बच्चे अध्ययनरत हैं।