हाईवे के किनारे बने अवैध घरों पर चला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बुलडोजर।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Bulldozer Action in Uttarakhand
हरिद्वार: सरकार द्वारा सड़क के दोनों किनारों पर बने करीब 85 पक्के निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया, स्थानीय लोगों ने किया विराध।
Bulldozer Action in Uttarakhand
उत्तराखंड में एक बार फिर से बुलडोजर की कार्रवाई देखने को मिली है। बीते दिन हरिद्वार के सलेमपुर गांव में हाईवे के दोनों तरफ बुलडोजर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के दौरान, टीम ने जेसीबी की सहायता से सड़क के दोनों किनारों पर बने करीब 85 पक्के निर्माण को ध्वस्त किया गया। स्थानीय लोगों द्वारा इसपर विरोध किया गया। लेकिन सिंचाई विभाग की अधिशासी अभियंता मंजू डैनी की सख्ती के चलते, जेसीबी अतिक्रमण ध्वस्त करते हुए कार्रवाई जारी रही।
85 अवैध निर्माण किए गए ध्वस्त
सरकार के आदेश के बाद बीते दिन गुरुवार को हरिद्वारा के सलेमपुर गांव में एक संयुक्त टीम अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने गई। टीम के द्वारा सड़क के दोनों तरफ के अवैध कब्जों को हटा दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में नाले पर बने पक्के निर्माण, सड़क के किनारे लगे फ्लेक्स बोर्ड, लोगों की स्थापित लोहे की सीढ़ियां, टीन शेड, साइन बोर्ड, दुकानें, आदि को हटा दिया गया और मौके पर रखे सामान को भी जब्त किया गया।
इस दौरान अधिशासी अभियंता के सामने अतिक्रमण को हटाने के लिए छोटे व्यापारियों, अतिक्रमणकारियों और क्षेत्रीय नेताओं ने कार्रवाई को रोकने की गुहार लगाई। कहीं पर लोगों ने टीम को विरोध प्रदर्शन का सामना करना भी पड़ा। लोगों ने हाथ जोड़कर अतिक्रमण रोकने की गुहार भी लगाई और कुछ लोगों ने सिफारिश का दबाव बनाने की भी कोशिश की। लेकिन इन सब के बावजूद भी अतिक्रमण का कार्य नहीं रुका। मौके पर पीडब्ल्यूडी सहायक अभियंता कीर्ति वर्धन नेगी, डीआरओ सिंचाई, नायब तहसीलदार, और अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
9.94 करोड़ की लागत से होगा नाले का निर्माण
इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए अधिशासी अभियंता मंजू डैनी ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सलेमपुर सिडकुल हाईवे के दोनों ओर 9.94 करोड़ रुपये की लागत से नाले का निर्माण किया जा रहा है। जिसके बाद क्षेत्र में पानी का सही निकास होगा और लोगों को जलभराव से मुक्ति मिलेगी।
नाले के दोनों ओर लगभग 85 पक्के निर्माण को जेसीबी की सहायता से हटा दिया गया है। लोगों को पहले ही अतिक्रमण खुद से हटाने के लिए कहा गया था और लेकिन उनके द्वारा यह नहीं किया गया तो सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी। भविष्य में इस तरह के अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।