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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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रुद्रप्रयाग: सबसे ऊंचे शिव मंदिर श्री तुंगनाथ के साथ ही द्वितीय केदार बाबा मद्महेश्वर महादेव के भी कपाट खुलने की तिथि सुनिश्चित हो गई है।
श्री केदारनाथ और मद्महेश्वर के शीतकालीन गद्दी स्थल ऊखीमठ में पूजा-अर्चना के बाद पंचाग गणना के पश्चात द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट खुलने का शुभ-दिन घोषित हुआ। इसके साथ ही श्री मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि निर्धारित हई।