उत्तराखंड: शहीद मेजर प्रणय का पार्थिव शरीर पहुंचा घर, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

शहीद मेजर प्रणय नेगी का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचते ही परिजन बिलख पड़े। इस दौरान सैकड़ों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
Advertisement 90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
Martyr Major Pranay Negi : Soldier Martyr Major Pranay Negi Mortal Remains Reached Home
Image: Soldier Martyr Major Pranay Negi Mortal Remains Reached Home

देहरादून: इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला सहित ग्रामीणों ने नम आंखों से दी शहीद मेजर को श्रद्धांजलि।

Soldier Martyr Major Pranay Negi Mortal Remains Reached Home

कारगिल में तैनात उत्तराखंड के लाल प्रणय नेगी का बीते मंगलवार को निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर उनके घर भनियाववाला पहुंचते ही परिजन बिलख पड़े, इस दौरान सैकड़ों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। मेजर प्रणय नेगी लेह में हाई एटीट्यूड पर ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे। शहीद होने की खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया था।

  • पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व कैबिनेट मंत्री ने दी श्रद्धांजलि

    Former CM and Cabinet Minister paid tribute
    Pic: 1/ 1
    Image: Former CM and Cabinet Minister paid tribute

    शहीद मेजर प्रणय नेगी को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके आवास पर सैकड़ों लोगों की भीड़ थी। इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला सहित ग्रामीणों ने नम आंखों से शहीद मेजर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।

    शहीद मेजर तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनकी शादी तीन साल पहले हुई थी और उनका डेढ़ साल का एक बेटा भी है। चाचा नरेंद्र नेगी के मुताबिक, लेह में हाई एटीट्यूड में तैनाती के दौरान ऑक्सीजन की कमी से मेजर की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ी जिसके बाद वे शहीद हो गए। उनके दादा भी फौज में थे, जबकि पिता ने होटल लाइन में नौकरी कर तीनों बच्चों को मसूरी के प्रतिष्ठित स्कूलों से शिक्षा दिलाई और प्रणव नेगी 2013 में आईएमए से पासआउट होकर सेना में लेफ्टिनेंट बने थे। वो मूल रूप से थाती डांगर गांव कीर्तिनगर टिहरी के रहने वाले थे।