Kedarnath: 3500 मीटर की ऊंचाई पर मचते हुड़दंग से वैज्ञानिक चिंतित, बोले आ सकती है 2013 जैसी आपदा

चारधाम यात्रा के शुरू होते ही यात्रियों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, श्रद्धालु की बढ़ती संख्या को देखते हुए हिमनद वैज्ञानिक चिंतित नजर आ रहे हैं और उन्होंने मानवीय गतिविधियों को नियंत्रित करने की सलाह दी है।
Advertisement Best Hidden Treks in Kedar Himalaya for True Mountain Lovers

A chance to reconnect with nature and inner peace. Treks in Kedar Himalaya that stay with you for a lifetime.

Example Ads Media
Scientists worried about Kedarnath: Glaciologists Express Concern Over Increasing Number of Devotees in Kedarnath
Image: Glaciologists Express Concern Over Increasing Number of Devotees in Kedarnath

रुद्रप्रयाग: यात्रियों की बढ़ती संख्या आने वाले समय में एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है। हिमनद वैज्ञानिकों ने इसपर चिंता जताते हुए कहा है कि केदार घाटी में मानवीय गतिविधियों को कंट्रोल करने की जरूरत है, वरना यहाँ की जैव विविधता पर असर पड़ेगा। ऊंचाई पर होने से यह क्षेत्र काफी संवेदनशील है इसे ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक मानवीय गतिविधियों को कम करने पर जोर दे रहे हैं।

Glaciologists Express Concern Over Increasing Number of Devotees in Kedarnath

प्रत्येक साल यात्रा में आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, पिछले साल चारधाम यात्रा में 56 लाख यात्री धामों में दर्शन करने पहुंचे थे। सिर्फ केदारनाथ में ही करीब 20 लाख श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे और इस साल यह आकड़ा कई ज्यादा पहुँच सकता है। श्रद्धालुओं की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए वैज्ञानिकों ने आगाह कर दिया है कि केदार घाटी की संवेदनशीलता को देखते हुए मानवीय गतिविधियों को कंट्रोल किया जाए और केदारनाथ मंदिर से ऊपर घाटी में जाने वाले श्रद्धालुओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की सलाह भी दी है।

वैज्ञानिक बोले यात्रियों पर करें नियंत्रण

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी से सेवानिवृत हिमनद वैज्ञानिक डॉ. डीपी डोभाल ने बताया कि केदार वैली लूज मटेरियल से बना हुआ है, जिस वजह से पूरी केदार घाटी संवेदनशील है। इस सीजन केदार घाटी में बर्फ़बारी कम हुई है जिसके चलते अभी तक कोई एवलांच की घटना सामने नहीं आई है, लेकिन 15 जून के बाद बरसात शुरू हो जाएगी और उस दौरान घाटी और अधिक संवेदनशील हो जाती है। जिसके चलते लैंडस्लाइड और सड़कों के टूटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। आस्था से जुड़ी केदारनाथ यात्रा को रोका तो नहीं जा सकता है लेकिन कंट्रोल किया जा सकता है।

केदार घाटी में वेदर स्टेशन होना जरूरी

डॉ. डीपी डोभाल ने बताया कि सरकार को एक ऐसी संस्था या ग्रुप बनाना चाहिए जो केदार घाटी पर रिसर्च करता रहे ताकि इससे जानकारी मिलती रहे की किस जगह पर एवलांच होने की सम्भावना है और अगर एवलांच होता है तो कितना मलबा नीचे तक आएगा। साथ ही मौसम के सही अनुमान के लिए एक वेदर स्टेशन भी होना चाहिए। जिससे मौसम के पूर्वानुमान से श्रद्धालुओं की संख्या तय होगी और किसी भी घटना के दौरान जान-माल को बचाया जा सकेगा।

केदारनाथ से ऊपर यात्रियों को करें प्रतिबंधित

हिमनद वैज्ञानिक ने डीपी डोभाल ने कहा कि यात्री बाबा केदार के दर्शन के बाद मंदिर के ऊपर वैली में घूमने के लिए निकल जाते हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन के बाद नीचे भेज देना चाहिए मंदिर से ऊपर जाने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं दी जानी चाहिए। भविष्य के लिहाज से ये ठीक नहीं है क्यूंकि यदि ऐसा नहीं होता है तो गंगोत्री धाम जैसे हालात केदारनाथ में भी बन जाएंगे। मंदिर के ऊपर ग्लेशियर मौजूद है ऐसे में अगर लोग वहां पहुँचते हैं तो वहां गन्दगी के साथ-साथ ग्लेशियर की हेल्थ पर भी असर पड़ेगा। मानवीय गतिविधि से उस क्षेत्र के तापमान में भी बढ़ोतरी होगी जिससे ग्लेशियर पर फर्क पड़ेगा। सरकार को संवेदनशील वैली में मानव गतिविधियों को बंद कर देना चाहिए ताकि केदार वैली को सुरक्षित रखा जा सके।