यात्रियों को तीर्थपुरोहितों के आवासीय और व्यवसायिक भवनों के साथ-साथ जीएमवीएन के कॉटेज में भी ठहराया जाएगा। इसके अलावा, यहां निजी टेंट की सुविधा भी उपलब्ध होंगी। इस बार गौरीकुंड से केदारनाथ तक एक रात में 17000 यात्रियों के ठहरने के इंतजाम किए जा रहे ह
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Image: 17 thousand pilgrims per day could stay in Kedarnath Dham
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा 2025 आगामी 2 मई से शुरू होने जा रही है। प्रशासन द्वारा यात्रा की तैयारियों का खाका तैयार किया जा चुका है, जिसे जल्द ही जिसे धरातल पर जल्द उतार दिया जाएगा। गढ़वाल मंडल विकास निगम को यात्रियों के भोजन और रात्रि ठहराव की जिम्मेदारी दी गई है।
17 thousand pilgrims per day could stay in Kedarnath Dham
केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य के तहत यात्रियों की व्यवस्थाओं के लिए कई नए भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त, यहां टेंट और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रशासन द्वारा केदारनाथ यात्रा की लगभग सभी तैयारियां की जा चुकी हैं। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर रामबाड़ा से लिनचोली के बीच बर्फ हटाने का कार्य भी लगभग समाप्त हो चुका है। लोनिवि के श्रमिकों द्वारा लिनचोली से छानी कैंप के बीच बर्फ हटा रहे हैं, कुछ संवेदनशील स्थानों पर तीन फीट से अधिक बर्फ जमी हुई है। इन सभी कार्यों को आगामी 25 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन जगहों पर लगेंगे टेंट
प्रशासन के अनुसार, यात्रियों को तीर्थपुरोहितों के आवासीय और व्यवसायिक भवनों के साथ-साथ जीएमवीएन के कॉटेज में भी ठहराया जाएगा। इसके अलावा, यहां निजी टेंट की सुविधा भी उपलब्ध होंगी। धाम में एक रात में अधिकतम 15,000 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था कराई जाएगी। साथ ही गौरीकुंड और केदारनाथ के बीच पैदल मांग के पड़ावों जैसे जंगलचट्टी, भीमबली, छोटी लिनचोली, बड़ी लिनचोली, छानी कैंप, रुद्रा प्वाइंट, बेस कैंप में भी करीब 2000 यात्रियों के रात्रि विश्राम के लिए इंतजाम किए जाएंगे। इस बार गौरीकुंड से केदारनाथ तक एक रात में 17000 यात्रियों के ठहरने के इंतजाम किए जा रहे हैं।
केदारनाथ धाम यात्रा केदार घाटी के स्थानीय लोगों के लिए जीवन यापन के लिए बहुत जरूरी है। कई पीढ़ियों से स्थानीय लोग रोजगार के लिए यात्रा पर निर्भर रहे हैं। सरकार को स्थानीय लोगों को भी साथ में जोड़ते हुए रोजगार नौकरी अथवा अन्य संभावनाएं भी देनी होगी, ताकि यात्रा का सही मायनों में सफल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।