Uttarakhand News: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग की अंतिम टनल का सफल ब्रेकथ्रू, गूलर से व्यासी आरपार

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड जैसी उन्नत तकनीक और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया....
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना: Breakthrough of tunnel between Gular and Vyasi
Image: Breakthrough of tunnel between Gular and Vyasi

ऋषिकेश: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना का पहला पड़ाव आरपार हो गया है। परियोजना के तहत गूलर से व्यासी के बीच 6.6 किमी लंबी अंतिम सुरंग का भी सफल ब्रेकथ्रू हो गया है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेल लाइन ने अंतिम सुरंग का ब्रेकथ्रू कर ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है।

Breakthrough of tunnel between Gular and Vyasi

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत पैकेज-2 की मुख्य और अंतिम सुरंग अब पूरी हो गई है। यह सुरंग गूलर से व्यासी तक है, बीते शुक्रवार को इस सुरंग का ब्रेकथ्रू हुआ है। गूलर से व्यासी तक की इस सुरंग की कुल लंबाई 6.6 किलोमीटर है। इससे पहले शिवपुरी से गूलर के बीच की 6.5 किमी की पहली सुरंग का ब्रेकथ्रू हो चुका है। ये दोनों मुख्य सुरंगें सुरंगें कठिन पर्वतीय भूगोल, भूकंपीय संवेदनशीलता और जटिल भूगर्भीय संरचनाओं से गुजरती हैं। अंतिम सुरंग के ब्रेकथ्रू को महीनों की सटीक योजना, भूगर्भीय विश्लेषण और तकनीकी दक्षता के साथ पूरा किया गया।

न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीकी

इस रेलवे परियोजना में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड जैसी उन्नत तकनीक और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। एलएंडटी, आरवीएनएल और युक्सेल आईसीटी के वरिष्ठ अधिकारियों ने गूलर से व्यासी तक की अंतिम सुरंग का सफल ब्रेकथ्रू होने के अवसर पर पूरी टीम के प्रयासों और समर्पण की सराहना की है। इस अंतिम सुरंग के ब्रेकथ्रू को महीनों की सटीक योजना, भूगर्भीय विश्लेषण और तकनीकी दक्षता के साथ पूरा किया गया।

विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के परियोजना प्रबंधक रविकांत ने बताया कि यह सफलता योजना, इंजीनियरिंग कौशल और श्रमिकों की मेहनत का परिणाम है। इस सुरंग निर्माण के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें कठोर चट्टानें, भूमिगत जल रिसाव और प्रतिकूल मौसम शामिल थे। यह ब्रेकथ्रू केवल तकनीकी सफलता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह चारधाम यात्रा को सरल बनाने और उत्तराखंड के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इस परियोजना के इस चरण की सफलता से भविष्य में यात्री परिवहन में सुविधा बढ़ेगी और यात्रा के समय में काफी कमी आएगी।