पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने और वरिष्ठता विवाद को लेकर राजकीय शिक्षक संघ कार्य बहिष्कार पर है। प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक का प्रभार देख रहे शिक्षकों ने भी प्रभारी व्यवस्था से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया है..
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: State Teachers Union boycotts work
देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षकों और सरकार के बीच का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने और वरिष्ठता विवाद को लेकर राजकीय शिक्षक संघ कार्य बहिष्कार पर है। इन विवादों के बीच प्रदेश के लाखों छात्रों का भविष्य ख़राब हो रहा है। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी थी, अब हड़ताल के कारण यह समस्या और गंभीर हो गई है।
State Teachers Union boycotts work
उत्तराखंड शिक्षा विभाग के आकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, एलटी (सहायक अध्यापक) और प्रवक्ताओं के कुल 9810 पद खाली पड़े हैं। प्रदेश के 1385 इंटर कॉलेजों में से 1180 में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं। इसी तरह 910 हाईस्कूलों में से 830 में नियमित प्रधानाध्यापक का अभाव है। प्रदेश के इंटर कॉलेजों में एलटी के 3055 और प्रवक्ताओं के 4745 पद रिक्त हैं। शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी के कारण कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं।
कोढ़ में खाज शिक्षकों का कार्य बहिष्कार
राजकीय शिक्षक संघ प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने और वरिष्ठता विवाद को लेकर 18 अगस्त से कार्य बहिष्कार पर है। साथ ही हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक का प्रभार देख रहे शिक्षकों ने भी प्रभारी व्यवस्था से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया है। इसका सीधा असर प्रदेश में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाले 1,51,812 छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है।
पहले ही न्यायालय में मामला
उत्तराखंड सरकार ने तय किया है कि 1385 प्रधानाचार्य पदों में से 50% पद सीमित भर्ती परीक्षा और शेष 50% पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। लेकिन राजकीय शिक्षक संघ इसका विरोध कर रहा है। संघ चाहता है कि प्रधानाचार्य के पद 100% पदोन्नति से ही भरे जाने चाहिए। इसी विवाद के चलते प्रदेश में बीते आठ सालों से पदोन्नति प्रक्रिया ठप पड़ी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से विभाग भी असमंजस में है।
अतिथि शिक्षक भी पढ़ाने से ज्यादा आंदोलनरत
सरकार ने अस्थायी व्यवस्था के तौर पर अतिथि शिक्षक नियुक्त किए थे, लेकिन वे भी नियमितीकरण की मांग को लेकर कई बार आंदोलन कर चुके हैं। शिक्षकों और सरकार के बीच चल रहे विवाद का सीधा असर प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। शिक्षा विभाग का 7500 करोड़ रुपये का वार्षिक बजट बच्चों की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और पेशेवर विकास पर खर्च किया जाता है, लेकिन केंद्र सरकार के सर्वेक्षण बताते हैं कि उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा लगातार पिछड़ रही है।
सरकार शिक्षा के सुधारीकरण को प्रतिबद्ध: रावत
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि “सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर प्रतिबद्ध है। स्मार्ट क्लासरूम, वर्चुअल क्लास, आधुनिक पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। निशुल्क पुस्तकें दी जा रही हैं। साथ ही शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया भी गतिमान है।”