उत्तराखंड: नन्ही परी हत्याकांड पर जनता में आक्रोश, धामी सरकार दाखिल करेगी पुनर्विचार याचिका

सीएम धामी ने अधिकारियों को सख्त आदेश दिया है कि नन्ही परी मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत दलीलें पेश की जाएं। “न्याय की इस लड़ाई में उत्तराखंड सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
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Nanhi Pari Murder Case: Dhami Govt to File Review in Nanhi Pari Case
Image: Dhami Govt to File Review in Nanhi Pari Case

पिथौरागढ़: उत्तराखंड की जनता को झकझोर देने वाले नन्ही परी हत्या कांड मामले में राज्यसरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुख्य आरोपी को बरी किए जाने के बाद प्रदेशभर में आक्रोश की लहर फैल गई थी। अब मुख्यमंत्री धामी ने न्याय विभाग को निर्देश दिया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए और केस की मजबूती से पैरवी की जाए।

Dhami Govt to File Review in Nanhi Pari Case

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की बेटियों के साथ दरिंदगी करने वालों को सजा दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने न्याय विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पिथौरागढ़ नन्ही परी दुष्कर्म-हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दाखिल की जाए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त आदेश दिया है कि नन्ही परी मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेकर सुप्रीम कोर्ट में मजबूत दलीलें पेश की जाएं। “न्याय की इस लड़ाई में उत्तराखंड सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। इस मामले में अच्छी से अच्छी कानूनी टीम लगाई जाएगी और केस को पूरी ताकत से लड़ा जाएगा।”

6 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप

गौरतलब हो कि 20 नवंबर 2014 को काठगोदाम (हल्द्वानी) से छह वर्षीय मासूम अपने परिवार के साथ शादी समारोह में शामिल होने पिथौरागढ़ आई हुई थी। इसी दौरान बच्ची अचानक लापता हो गई। छह दिन तक तलाश जारी रही, लेकिन बच्ची का कोई पता नहीं चला, फिर सातवें दिन उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की पुष्टि हुई। इस घटना के आठ दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था।

आरोपी के बरी होने पर जनता में आक्रोश

पुलिस ने मुख्य आरोपी अख्तर अली के साथ ही दो अन्य आरोपी प्रेमपाल और जूनियर मसीह को भी हिरासत में लिया था। मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, प्रेमपाल को 5 साल की सजा दी गई। अक्टूबर 2019 में नैनीताल हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। लेकिन 10 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपी अख्तर अली को बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने पूरे कुमाऊं क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया। लोग न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे, जगह-जगह कैंडल मार्च और प्रदर्शन आयोजित हुए। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने सरकार से अपील की कि मासूम को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।