चमोली: टनल के अंदर दौड़ती रही ट्रेन, बचने की नहीं थी जगह.. हादसे की खौफनाक कहानी

टनल निर्माण परियोजना के दौरान बिना ऑपरेटर के लोको ट्रेन अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई और करीब तीन किलोमीटर तक पटरी पर दौड़ती रही। इस भयावह घटना में 70 श्रमिक गंभीर व सामान्य रूप से घायल हो गए,
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Chamoli Tunnel Accident: Driverless Loco Runs 3 Km in Chamoli Tunnel Accident
Image: Driverless Loco Runs 3 Km in Chamoli Tunnel Accident

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में एक बड़े औद्योगिक हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। टनल निर्माण परियोजना के दौरान बिना ऑपरेटर के लोको ट्रेन (टनल के भीतर सामग्री ढोने वाली छोटी ट्रेन) अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई और करीब तीन किलोमीटर तक पटरी पर दौड़ती रही। इस भयावह घटना में 70 श्रमिक गंभीर व सामान्य रूप से घायल हो गए, जिनमें कई को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

Driverless Loco Runs 3 Km in Chamoli Tunnel Accident

जानकारी के अनुसार, टनल के भीतर सामग्री परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली लोको ट्रेन किसी तकनीकी खराबी या सुरक्षा चूक के कारण स्वतः आगे बढ़ गई। उस वक्त टनल में बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत थे। तेज रफ्तार में आती ट्रेन को देखकर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन संकरी जगह और सीमित निकास के कारण कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए।

राहत और बचाव कार्य

इस हादसे के तुरंत बाद प्रशासन, परियोजना प्रबंधन और आपदा राहत दल मौके पर पहुंचे। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल और आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया। कुछ श्रमिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखते हुए हेल्पलाइन भी सक्रिय कर दी है।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

इस घटना ने टनल और बड़ी निर्माण परियोजनाओं में सेफ्टी ऑडिट, मशीन ऑपरेशन प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना ऑपरेटर के किसी मशीन का इतनी दूरी तक चलना फेल-सेफ सिस्टम की विफलता दर्शाता है। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और परियोजना से जुड़े ठेकेदारों व तकनीकी एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।

आगे की कार्रवाई

जांच पूरी होने तक प्रभावित सेक्शन में काम रोक दिया गया है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) की समीक्षा करने की बात कही गई है। श्रमिक संगठनों ने घायलों के लिए मुआवजे और बेहतर सुरक्षा उपायों की मांग की है।