उत्तराखंड के कमल ध्यानी की दिल्ली में मौत हो गई। बाइक से ऑफिस से घर लौटते समय वह जल विभाग द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिर गए। हादसा भावुक कर देने वाला है, क्योंकि अगले ही दिन उनके माता-पिता की शादी की सालगिरह थी, जिसकी तैयारी वह पहले ही कर चुके थे..
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Image: Uttarakhand Native Dies After Falling into Open Pit in Delhi
देहरादून: दिल्ली में उत्तराखंड मूल के कमल ध्यानी की बाइक से घर लौटते समय खुले गड्ढे में गिरने से मौत हो गई। जल विभाग द्वारा खोदे गए गड्ढे के आसपास कोई चेतावनी संकेत नहीं था। ठेकेदार को पहले ही सूचना मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवार ने कई थानों में शिकायत की, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
Uttarakhand Native Dies After Falling into an Open Pit in Delhi
यह दर्दनाक हादसा दिल्ली में उस समय हुआ, जब कमल ध्यानी रात को बाइक से ऑफिस से घर लौट रहे थे। रास्ते में जल विभाग द्वारा सड़क खोदी गई थी, गड्ढे के आसपास कोई बैरिकेडिंग नहीं थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगा था, अंधेरे में कमल को गड्ढा दिखाई नहीं दिया और वह सीधे उसमें गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सालगिरह से पहले टूटा परिवार का सपना
कमल ध्यानी मूल रूप से उत्तराखंड के निवासी थे और दिल्ली में नौकरी कर रहे थे। परिजनों के अनुसार अगले दिन माता-पिता की शादी की सालगिरह थी, कमल पहले ही केक, गिफ्ट और सामान लेकर आ चुके थे और रविवार को परिवार के साथ जश्न मनाने की योजना थी। लेकिन किसे पता था कि खुशियों से पहले मातम छा जाएगा।
जल विभाग और ठेकेदार की लापरवाही
गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कार्य के दौरान खोदा गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि ठेकेदार को समय रहते सूचना मिल चुकी थी पर फिर भी समय रहते कमल को नहीं बचाया गया। गड्डे के आसपास सुरक्षा बैरिकेड नहीं लगाए गए थे और कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया, यही लापरवाही कमल की मौत की वजह बनी।
सात थानों में शिकायत, फिर भी नहीं मिली मदद
परिजनों ने इंसाफ के लिए दिल्ली के सात पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई, अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की, दोषियों पर केस दर्ज करने की अपील की लेकिन परिवार का आरोप है कि उन्हें जवाब मिला: “तुम्हारा भाई कोई स्पेशल इंसान नहीं है, हमें और भी केस देखने हैं।” परिवार की मांग है कि ठेकेदार पर आपराधिक केस दर्ज हो, जल विभाग के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हो, मृतक के परिवार को मुआवजा मिले और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकी जाए। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला आपराधिक लापरवाही का बनता है।