केदारनाथ यात्रा पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! डिप्लोमा इंजीनियरों की ड्यूटी पर लगी मुहर

नैनीताल हाई कोर्ट ने केदारनाथ धाम यात्रा में डिप्लोमा इंजीनियरों की तैनाती को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार को कर्मचारियों की ड्यूटी तय करने का अधिकार है।
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Kedarnath Yatra 2026: Nainital High Court Upholds Deployment of Diploma Engineers in Kedarnath Yatra
Image: Nainital High Court Upholds Deployment of Diploma Engineers in Kedarnath Yatra

नैनीताल: केदारनाथ धाम यात्रा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में नैनीताल हाई कोर्ट ने डिप्लोमा इंजीनियरों की तैनाती को वैध और जनहित में आवश्यक बताया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इंजीनियरों की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केदारनाथ यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता और भारी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं को देखते हुए राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

Nainital High Court Upholds Deployment of Diploma Engineers in Kedarnath Yatra

याचिका उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की ओर से दायर की गई थी। संघ का तर्क था कि लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग में कार्यरत डिप्लोमा इंजीनियर तकनीकी विशेषज्ञ हैं, लेकिन उन्हें कथित तौर पर स्वच्छता जैसे गैर-तकनीकी कार्यों में लगाया जा रहा है, जो उनके कार्यक्षेत्र से बाहर है। हालांकि, अदालत में ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका जिससे यह साबित हो सके कि किसी भी इंजीनियर को स्वच्छता कार्य में लगाया गया है।

इंजीनियरों को कौन-से कार्य सौंपे गए?

खंडपीठ ने पांच अप्रैल 2023 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इंजीनियरों को यात्रा मार्ग पर भूस्खलन रोकने, पैदल मार्गों की मरम्मत और रखरखाव, आपातकालीन तकनीकी निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। कोर्ट ने कहा कि ये सभी कार्य यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और पूरी तरह तकनीकी प्रकृति के हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि स्वच्छता और संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी सुलभ इंटरनेशनल, नगर निकाय, नगर पालिका अधिकारियों को सौंपी गई है। इस प्रकार इंजीनियरों को सफाई कार्य में लगाए जाने का दावा निराधार पाया गया।

सरकार को मिला अधिकारिक समर्थन

अदालत ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार को जनहित और सेवा की अनिवार्यता के आधार पर अपने कर्मचारियों को विशेष ड्यूटी पर तैनात करने का अधिकार है। सरकारी कर्मचारियों को जनहित में सौंपे गए कार्यों का पालन करना अनिवार्य है।

केदारनाथ यात्रा की बढ़ती चुनौती

हर वर्ष लाखों श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। कठिन पर्वतीय मार्ग, मौसम की अनिश्चितता और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के बीच यात्रा को सुरक्षित बनाना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती को अदालत ने आवश्यक और उचित ठहराया है।
नैनीताल हाई कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। डिप्लोमा इंजीनियरों को सौंपे गए कार्य तकनीकी और जनहित से जुड़े हैं, न कि स्वच्छता संबंधी। इस निर्णय से राज्य सरकार को प्रशासनिक अधिकारों पर न्यायिक समर्थन मिला है और यात्रा प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।