उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर ने शीतकालीन यात्रा 2025-26 में 47,868 श्रद्धालुओं के दर्शन के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। शिव-पार्वती विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर अब वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी राष्ट्रीय पहचान बना चुका है..
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Triyuginarayan Temple Records 47 868 Devotees During Winter Yatra
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर ने इस वर्ष शीतकालीन यात्रा (24 अक्तूबर से 21 फरवरी) के दौरान आस्था का नया इतिहास रच दिया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार इस अवधि में कुल 47,868 श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7 हजार अधिक है। बीते वर्ष शीतकालीन दर्शन का आंकड़ा करीब 40 हजार था, जो इस बार बढ़कर 47 हजार के पार पहुंच गया।
Triyuginarayan Temple Records 47,868 Devotees During Winter Yatra
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पवित्र स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित अखंड अग्निकुंड को उसी दिव्य विवाह का साक्षी माना जाता है, जो युगों से निरंतर प्रज्वलित है। श्रद्धालु इस अग्नि को साक्षी मानकर वैवाहिक सुख-समृद्धि और मंगलकामनाएं करते हैं।
वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ती पहचान
देशभर में “वेडिंग डेस्टिनेशन” के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर अब सालभर विवाह समारोहों का केंद्र बन चुका है। शुभ मुहूर्तों में यहां नवयुगलों की लंबी बुकिंग सूची देखने को मिलती है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर भी रिकॉर्ड संख्या में विवाह संपन्न हुए, जिससे मंदिर की राष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई है।
शीतकाल में भी नहीं थमी श्रद्धा
जहां अधिकांश पर्वतीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान तीर्थाटन धीमा पड़ जाता है, वहीं त्रियुगीनारायण में श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही ने नया उदाहरण पेश किया। बर्फीली ठंड के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे भक्तों ने दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
बढ़ती संख्या के पीछे ये कारण
मंदिर प्रबंधक अजय शर्मा के अनुसार इस बार अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। इसके प्रमुख कारण बेहतर सड़क संपर्क, ऑनलाइन सूचना एवं बुकिंग प्रणाली और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में लोकप्रियता हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला सहारा
श्रद्धालुओं और विवाह समारोहों की बढ़ती संख्या से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, पंडिताई व्यवस्था, परिवहन क्षेत्र को सीधा लाभ मिला है। शीतकाल में भी बाजारों में रौनक बनी रही, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
आंकड़ों में शीतकालीन यात्रा
वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या
2024-25 लगभग 40,000
2025-26 47,868