उत्तराखंड: केदारनाथ-बदरीनाथ में गैर सनातनियों की एंट्री बैन! सारा अली खान को देना होगा शपथ पत्र?

चारधाम यात्रा से पहले बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव रखा है। मंदिर परिसर में मोबाइल बैन की तैयारी भी चल रही है। अभिनेत्री सारा खान के दर्शन को लेकर भी शपथ पत्र की शर्त सामने आई है।
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Kedarnath entry rules 2026: BKTC Plans Changes for Kedarnath-Badrinath Entry
Image: BKTC Plans Changes for Kedarnath-Badrinath Entry

देहरादून: इस वर्ष शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा से पहले बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने बड़ा निर्णय लिया है। समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव सामने आया है। इस संबंध में हाल ही में आयोजित प्रेसवार्ता में समिति की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह निर्णय मंदिरों की पौराणिक परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

BKTC Plans Changes for Kedarnath-Badrinath Entry

BKTC की बैठक में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित अन्य मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इस प्रस्ताव के तहत केवल वही लोग मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे, जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं। यह कदम धार्मिक परंपराओं को संरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया बताया जा रहा है।

सारा खान के सवाल पर BKTC का जवाब

अभिनेत्री सारा खान के केदारनाथ धाम में दर्शन करने के सवाल पर BKTC अध्यक्ष ने अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति सनातन धर्म में विश्वास और आस्था रखता है, वह सनातनी माना जाएगा। यदि सारा खान केदारनाथ धाम में दर्शन करने आती हैं, तो उन्हें एक शपथ पत्र देना होगा, जिसमें वे अपनी आस्था की पुष्टि करेंगी। इस बयान के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आ गया है।

मंदिर परिसर में मोबाइल पर भी लगेगा प्रतिबंध

मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए BKTC की ओर से एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मंदिर परिसर और गर्भगृह में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत SOP (Standard Operating Procedure) तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य मंदिरों के धार्मिक वातावरण को बनाए रखना और अनावश्यक भीड़ एवं व्यवधान को रोकना है।

सीएम धामी का बयान भी आया सामने

इस पूरे मामले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर विचार करेगी और बोर्ड के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जाएगा। साथ ही, कानून, एक्ट और पौराणिक परंपराओं का अध्ययन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इससे साफ है कि सरकार इस मुद्दे पर संतुलित और कानूनी दृष्टिकोण अपनाना चाहती है।

परंपरा बनाम आधुनिकता—बढ़ी बहस

इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद समाज में एक नई बहस शुरू हो गई है। एक पक्ष इसे धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए जरूरी मान रहा है। वहीं दूसरा पक्ष इसे भेदभावपूर्ण निर्णय बता रहा है। इससे यह मुद्दा अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है।
चारधाम यात्रा से पहले लिया गया यह प्रस्ताव आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकता है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो मंदिरों में प्रवेश के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। अब सभी की नजर सरकार और BKTC के अंतिम निर्णय पर टिकी है, जो तय करेगा कि परंपरा और कानून के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा।