मृतका के परिवार ने नेत्र विभाग की HOD डॉ. प्रियंका गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लगातार मानसिक उत्पीड़न के कारण तन्वी ने यह कदम उठाया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित HOD के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: HOD Booked in PG Medical Student Death
देहरादून: Dehradun में 25 वर्षीय PG मेडिकल छात्रा की कार में संदिग्ध हालात में मौत के बाद परिजनों ने विभाग की HOD पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
HOD Booked in PG Medical Student Death
25 वर्षीय PG मेडिकल छात्रा तन्वी मोहन अपनी कार में बेहोश अवस्था में मिलीं। उनके पिता ने कार का शीशा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस मामले में एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जो कि डॉ. तन्वी ने आत्महत्या से पहले अपने पिता को भेजा था। ऑडियो क्लिप में डॉ. तन्वी और उनकी HOD के बीच बातचीत बताई जा रही है। करीब आधे घंटे के इस ऑडियो में तन्वी काफी परेशान नजर आती हैं। वह कहती सुनाई देती हैं— “मैम, आप बताओ मैं किस-किस को खुश करूं और कैसे…”।
HOD के खिलाफ मामला दर्ज
मृतका के परिवार ने नेत्र विभाग की HOD डॉ. प्रियंका गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लगातार मानसिक उत्पीड़न के कारण तन्वी ने यह कदम उठाया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित HOD के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
आखिरी मैसेज बना रहस्य
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तन्वी पिछले काफी समय से अवसाद से जूझ रही थी। इसी कारण उसकी मां भी अंबाला से देहरादून आकर उसके साथ रह रही थीं। मंगलवार रात तन्वी ने अपनी मां को मैसेज कर बताया था कि वह देर रात तक घर लौट आएगी। लेकिन इसके बाद उसका फोन बंद हो गया, जिससे परिवार चिंतित हो गया।
डिप्रेशन से जूझ रही थी छात्रा
यह मामला न सिर्फ एक दुखद घटना है, बल्कि मेडिकल संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल के माहौल पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है.. आत्महत्या के कारण, उत्पीड़न के आरोप, मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट का इन्तजार है, जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी।
राज्य समीक्षा की अपील
राज्य समीक्षा की पाठकों से अपील है कि यदि आप या आपके आसपास कोई मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो उसकी मदद करना बेहद जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना ही समाधान की पहली सीढ़ी है।