15 साल बाद पौड़ी की पहाड़ियों में लौटा प्रकृति का सफाईकर्मी! यमकेश्वर में गिद्धों के झुंड देख ग्रामीण भी हुए हैरान

पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक में करीब 15 साल बाद बड़ी संख्या में गिद्ध दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञ इसे पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
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Pauri Vultures News: Vultures Return to Pauri Hills After 15 Years
Image: Vultures Return to Pauri Hills After 15 Years

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक से पर्यावरण के लिए अच्छी खबर सामने आई है। करीब 15 साल बाद क्षेत्र की पहाड़ियों में बड़ी संख्या में गिद्ध दिखाई दिए हैं। गिद्धों के झुंड को देखकर स्थानीय लोग भी हैरान हैं, जबकि वन्यजीव विशेषज्ञ इसे पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

Vultures Return to Pauri Hills After 15 Years

जानकारी के अनुसार यमकेश्वर ब्लॉक के सैंज गांव और माता श्याम सुंदरी पहाड़ी क्षेत्र में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में गिद्ध देखे गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों बाद एक साथ इतने गिद्धों को आसमान में उड़ते देखा है। ग्रामीणों के मुताबिक, एक सप्ताह पहले अचानक गिद्धों का बड़ा झुंड क्षेत्र के ऊपर मंडराता दिखाई दिया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

ग्रामीण बोले- डेढ़ दशक बाद दिखा ऐसा नजारा

स्थानीय निवासी मुकेश और कृष्णपाल ने बताया कि बचपन में गांवों के आसपास अक्सर गिद्ध दिखाई देते थे, लेकिन पिछले कई वर्षों से ये पक्षी लगभग गायब हो गए थे। उन्होंने कहा कि करीब 15 साल बाद गिद्धों के झुंड को देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। यह दृश्य पुराने दिनों की याद दिलाने वाला था।

प्रकृति के सफाईकर्मी कहलाते हैं गिद्ध

गिद्धों को प्रकृति का सबसे महत्वपूर्ण सफाईकर्मी पक्षी माना जाता है। ये मृत पशुओं के शवों को खाकर वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि गिद्ध न हों तो मृत जानवरों के अवशेष लंबे समय तक खुले में पड़े रहते हैं, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से गिद्धों की उपस्थिति किसी भी स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। आगे पढ़िए..

गिद्धों के गायब होने से प्रभावित हुआ था पर्यावरण

पिछले दो दशकों में देशभर में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इसके पीछे पशुओं में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं और पर्यावरणीय कारणों को प्रमुख वजह माना गया। गिद्धों की कमी के कारण प्राकृतिक सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई और पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा। ऐसे में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इनकी वापसी को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

राजाजी क्षेत्र में भी बढ़ी गिद्धों की संख्या

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवल यमकेश्वर ही नहीं, बल्कि Rajaji National Park क्षेत्र में भी गिद्धों की गतिविधियां बढ़ी हैं। वन दरोगा दाताराम ने बताया कि गिद्ध काफी लंबी दूरी तक उड़ान भरते हैं, इसलिए उनकी सटीक संख्या का अनुमान लगाना आसान नहीं होता। बावजूद इसके, हाल के दिनों में उनकी बढ़ती मौजूदगी स्पष्ट रूप से देखी गई है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए उत्साहजनक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गिद्धों की यह वापसी लगातार बनी रहती है, तो यह उत्तराखंड के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों और प्राकृतिक आवासों की बेहतर स्थिति का प्रमाण होगी। गिद्धों की बढ़ती संख्या न केवल पर्यावरण के लिए अच्छी खबर है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जैव विविधता संरक्षण का सकारात्मक संदेश देती है।